पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल में 'बंगाली राम मंदिर' का निर्माण: क्या है इसकी खासियत?
पश्चिम बंगाल में चुनावी हलचल
इस वर्ष पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, जहां ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) सत्ता में है। चुनावों से पहले मंदिर और मस्जिद के मुद्दों पर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। पिछले महीने, टीएमसी से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने मुर्शीदाबाद जिले के बेलडांगा में बाबरी मस्जिद की नींव रखी।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए, ममता बनर्जी ने दुर्गा आंगन और महाकाल मंदिर की नींव रखी। अब नादिया जिले के शांतिपुर में 'बंगाली राम' थीम पर एक विशाल राम मंदिर बनाने की योजना चर्चा का विषय बन गई है, जो चुनावी माहौल में नया मोड़ ला रही है।
'बंगाली राम मंदिर' की विशेषताएँ
यह मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं होगा, बल्कि बंगाल की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को बढ़ावा देने वाला केंद्र भी बनेगा। इसकी थीम 15वीं सदी के प्रसिद्ध कवि कृतिबास ओझा से जुड़ी है।
कृतिबास ने संस्कृत रामायण का बंगाली में 'श्रीराम पंचाली' के रूप में अनुवाद किया, जो आज भी बंगाल के घरों में प्रचलित है। इसी कारण राम जी को 'बंगाली राम' या 'हरा राम' के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर यहां की भक्ति परंपरा को जीवित रखने का प्रतीक होगा।
मंदिर का निर्माण कौन कर रहा है?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, श्री कृतिबास राम मंदिर ट्रस्ट इस परियोजना का संचालन कर रहा है। ट्रस्ट 2017 से इस पर कार्य कर रहा है। हाल ही में, ट्रस्ट ने बताया कि मंदिर की भूमि का अंतिम सर्वेक्षण पूरा हो गया है, जिसे परियोजना की शुरुआत माना जा रहा है। ट्रस्ट का उद्देश्य है कि मंदिर न केवल धार्मिक हो, बल्कि यहां सांस्कृतिक गतिविधियों का भी आयोजन हो।
भाजपा की भूमिका
ट्रस्ट के अध्यक्ष अरिंदम भट्टाचार्य, जो पहले टीएमसी के विधायक थे और अब भाजपा में शामिल हो चुके हैं, शांतिपुर से जुड़े हैं। भट्टाचार्य का कहना है कि यह कोई चुनावी योजना नहीं है।
शांतिपुर भक्ति आंदोलन का केंद्र है, जहां कृतिबास ओझा ने राम को बंगाली संस्कृति से जोड़ा। हालांकि, भाजपा के साथ उनका संबंध इस मुद्दे को राजनीतिक रंग दे रहा है।
मंदिर परिसर में मेडिकल कॉलेज का निर्माण
मंदिर के लिए 15 बीघा भूमि स्थानीय निवासी लितन भट्टाचार्य और पूजा बनर्जी ने दान की है। परियोजना की कुल लागत लगभग 100 करोड़ रुपये है, और इसे 2028 तक पूरा करने की योजना है।
मंदिर परिसर में केवल मंदिर ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक केंद्र, मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज और अनुसंधान केंद्र भी बनाए जाएंगे। नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर से जुड़े वैदिक विद्वान अर्जुन दासतुला को इसका संरक्षक बनाया गया है।