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पश्चिम बंगाल में चुनावी संकट: भाजपा और तृणमूल कांग्रेस की नाराजगी

पश्चिम बंगाल में चुनावी स्थिति तनावपूर्ण हो गई है, जहां भाजपा और तृणमूल कांग्रेस दोनों ही चुनाव आयोग के खिलाफ नाराजगी जता रहे हैं। भाजपा के नेता चुनाव को रोकने की धमकी दे रहे हैं, जबकि ममता बनर्जी ने आयोग पर आरोप लगाया है कि लोगों के नाम गलत तरीके से काटे जा रहे हैं। जानें इस संकट के पीछे की वजह और इसके संभावित परिणाम क्या हो सकते हैं।
 

पश्चिम बंगाल में चुनावी स्थिति

पश्चिम बंगाल में एक अजीब स्थिति उत्पन्न हो गई है, जहां तृणमूल कांग्रेस और भाजपा दोनों ही चुनाव आयोग के खिलाफ नाराजगी जता रहे हैं। भाजपा के नेता यह दावा कर रहे हैं कि वे चुनाव को रोकने की कोशिश करेंगे। यह संभव है कि यह एक सुनियोजित रणनीति हो, जिसका उद्देश्य चुनाव को टालना हो। यदि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कोई गड़बड़ी सामने आती है, तो इससे चुनाव टल सकते हैं, जिसके परिणामस्वरूप राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करना पड़ सकता है। भाजपा के कई नेता मानते हैं कि ममता बनर्जी को हराने के लिए राष्ट्रपति शासन आवश्यक है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शामिक भट्टाचार्य ने बताया कि उनकी पार्टी के कार्यकर्ता फॉर्म सात जमा कर रहे हैं, लेकिन आयोग सभी नामों को मतदाता सूची में शामिल नहीं कर रहा है।


भाजपा और तृणमूल कांग्रेस की प्रतिक्रियाएँ

भट्टाचार्य ने चेतावनी दी है कि यदि भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा जमा किए गए फॉर्म सात के आधार पर मतदाता सूची में सुधार नहीं किया गया, तो उनकी पार्टी चुनाव को बाधित करेगी। दूसरी ओर, ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को चार पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि लॉजिक डिस्क्रिपेंसीज के कारण लोगों के नाम काटे जा रहे हैं, जिससे मतदाता परेशान हो रहे हैं। इससे पहले, उन्होंने नागरिकता परीक्षण के नाम पर मतदाता सूची में सुधार का विरोध किया था। हालांकि, एसआईआर का पहला चरण पश्चिम बंगाल में सफल रहा है, जिसमें कुल 58 लाख लोगों के नाम हटाए गए हैं। इस प्रक्रिया में किसी विशेष जाति या समुदाय के लोगों के नाम अधिकतर नहीं काटे गए हैं। फिर भी, दोनों प्रमुख पार्टियाँ चुनाव आयोग के खिलाफ अपनी नाराजगी व्यक्त कर रही हैं।