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पश्चिम बंगाल में नगरपालिका भर्ती घोटाले में पूर्व मंत्री सुजीत बोस की गिरफ्तारी: क्या है मामला?

पश्चिम बंगाल के नगरपालिका भर्ती घोटाले में पूर्व मंत्री सुजीत बोस की गिरफ्तारी ने एक नया मोड़ लिया है। ईडी की जांच में आरोप है कि उन्होंने 150 उम्मीदवारों की भर्ती में आर्थिक लाभ प्राप्त किया। इस मामले की जड़ें 2023 के शिक्षक भर्ती घोटाले से जुड़ी हैं, जिसमें कई नगरपालिकाओं में अनियमितताएं सामने आई हैं। जानें इस घोटाले के पीछे की पूरी कहानी और ईडी की जांच की दिशा।
 

पश्चिम बंगाल में बड़ा घटनाक्रम


सोमवार को पश्चिम बंगाल के चर्चित नगरपालिका भर्ती घोटाले में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया, जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पूर्व मंत्री सुजीत बोस को गिरफ्तार कर लिया। सूत्रों के अनुसार, उनकी गिरफ्तारी कई घंटों की पूछताछ के बाद हुई। उम्मीद की जा रही है कि उन्हें मंगलवार को विशेष अदालत में पेश किया जाएगा।


ईडी की जांच में क्या सामने आया?

ईडी की जांच में यह आरोप लगाया गया है कि सुजीत बोस ने दक्षिण दमदम नगरपालिका में विभिन्न पदों के लिए लगभग 150 उम्मीदवारों की सिफारिश की थी। इन नियुक्तियों के बदले में उन्हें आर्थिक लाभ प्राप्त हुआ। जांच एजेंसी का कहना है कि इस कथित अवैध धन का उपयोग फ्लैट खरीदने और अन्य संपत्तियों के लिए किया गया। इसके अलावा, उनके कई बैंक खातों में भारी नकद लेन-देन के सबूत भी मिले हैं।


पूछताछ और गिरफ्तारी

सोमवार की सुबह, सुजीत बोस अपने बेटे समुद्र बोस के साथ सॉल्ट लेक के सीजीओ कॉम्प्लेक्स पहुंचे, जहां ईडी अधिकारियों ने उनसे लंबी पूछताछ की। पूछताछ के कुछ घंटों बाद ही उन्हें हिरासत में लिया गया। इससे पहले भी ईडी ने उन्हें कई बार पूछताछ के लिए बुलाया था।


यह भी बताया जा रहा है कि विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान बोस को कई नोटिस जारी किए गए थे। उन्होंने चुनावी व्यस्तताओं का हवाला देते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट से पेशी में राहत मांगी थी। हालांकि, चुनाव समाप्त होने के बाद 1 मई को उन्होंने ईडी के समक्ष उपस्थित होकर अपना बयान दर्ज कराया।


भर्तियों में अनियमितताएं

इस मामले की जड़ें 2023 में सामने आए शिक्षक भर्ती घोटाले से जुड़ी बताई जा रही हैं। उसी जांच के दौरान ईडी को ऐसे दस्तावेज और डिजिटल सबूत मिले, जो यह दर्शाते हैं कि भ्रष्टाचार केवल शिक्षक नियुक्तियों तक सीमित नहीं था, बल्कि कई नगरपालिकाओं की भर्तियों में भी बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं।


जांच एजेंसियों के अनुसार, यह घोटाला मजदूर, सफाईकर्मी, क्लर्क, चपरासी, एंबुलेंस अटेंडेंट, पंप ऑपरेटर और ड्राइवर जैसे कई पदों की भर्ती से संबंधित है। आरोप है कि अयोग्य उम्मीदवारों को पैसे लेकर नौकरी दिलाई गई।


ईडी का यह भी कहना है कि नगर निकायों से जुड़े कई ठेके एक ही निजी कंपनी को दिए गए थे, जिसके माध्यम से भर्ती प्रक्रिया में हेरफेर की गई। अब एजेंसी इस पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की गहन जांच कर रही है।