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पश्चिम बंगाल में प्रवासी श्रमिकों पर हमलों के विरोध में प्रदर्शन: क्या है असली वजह?

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में प्रवासी श्रमिकों पर हमलों के विरोध में प्रदर्शन ने स्थिति को तनावपूर्ण बना दिया है। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय राजमार्ग-12 को जाम कर दिया, जिससे यातायात प्रभावित हुआ। यह मामला अब राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है, जिसमें तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप हो रहे हैं। जानें इस घटनाक्रम की पूरी कहानी और इसके पीछे की असली वजह।
 

मुर्शिदाबाद में तनावपूर्ण स्थिति


शनिवार को पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में हालात फिर से तनावपूर्ण हो गए, जब प्रवासी श्रमिकों पर हुए कथित हमलों के खिलाफ लोगों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन के कारण जिले में यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई, राष्ट्रीय राजमार्ग बंद कर दिए गए और रेल सेवाओं में भी रुकावट आई। एक दिन पहले हुई हिंसक घटनाओं के बाद स्थिति संभलने ही वाली थी कि नए आरोपों ने माहौल को फिर से गरमा दिया।


राष्ट्रीय राजमार्ग-12 पर जाम

यह मामला अब केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है। शनिवार को प्रदर्शनकारियों ने बेलडांगा क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग-12 को जाम कर दिया, जिससे उत्तर और दक्षिण बंगाल के बीच सड़क संपर्क ठप हो गया। बरुआ मोड़ पर बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए, जिससे बसों, ट्रकों और निजी वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। इसी दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने बेलडांगा रेलवे स्टेशन के पास रेलवे गेट को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की, जिससे ट्रेन परिचालन बाधित हुआ। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को बड़ी संख्या में तैनात किया गया।


प्रदर्शन की वजह

प्रशासन के हस्तक्षेप के दौरान कई स्थानों पर स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए सख्ती बरती गई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि भीड़ को हटाने के लिए कुछ स्थानों पर लाठीचार्ज भी किया गया। शनिवार के प्रदर्शन की वजह एक नया दावा बना, जिसमें कहा गया कि जिले के एक अन्य प्रवासी मजदूर अनीसुर शेख पर बिहार के गाजीपुर में काम के दौरान हमला किया गया। बताया गया कि वह गंभीर हालत में शुक्रवार देर रात मुर्शिदाबाद लौटे और उन्हें मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में भर्ती कराया गया।


तनाव की शुरुआत

बेलडांगा में तनाव की शुरुआत एक दिन पहले हुई थी, जब झारखंड में काम करने वाले 36 वर्षीय कबाड़ व्यापारी अलाउद्दीन शेख की संदिग्ध मौत की खबर सामने आई। उनका शव उनके किराए के कमरे से बरामद हुआ था। परिजनों का आरोप है कि उनकी पीट-पीटकर हत्या की गई और बाद में इसे आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई। इस घटना के विरोध में शुक्रवार को हुए प्रदर्शन हिंसक हो गए थे।


शुक्रवार की हिंसा

शुक्रवार की झड़पों के दौरान सियालदह-लालगोला रेल मार्ग को अवरुद्ध किया गया, राजमार्ग पर टायर जलाए गए और सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया। पत्थरबाजी में पत्रकारों समेत कम से कम 12 लोग घायल हुए, जिनमें दो महिला पत्रकार भी शामिल थीं। एक की हालत गंभीर बताई गई।


प्रशासन की कार्रवाई

हालात को शांत करने के लिए जिला प्रशासन सक्रिय हुआ। स्थानीय विधायक हुमायूं कबीर ने प्रदर्शन स्थल का दौरा कर लोगों से बातचीत की, जबकि जिला मजिस्ट्रेट ने प्रवासी श्रमिकों से जुड़े मामलों के लिए विशेष नियंत्रण कक्ष बनाने की घोषणा की। इस बीच भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। भाजपा ने राज्य सरकार पर जानबूझकर अशांति फैलाने का आरोप लगाया है, जबकि तृणमूल का कहना है कि भाजपा शासित राज्यों में बंगाली प्रवासी मजदूरों को निशाना बनाया जा रहा है। भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बीच जिले में फिलहाल तनाव बरकरार है।