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पश्चिम बंगाल में मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने पर राजनीतिक विवाद

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने का मुद्दा अब राजनीतिक विवाद का नया केंद्र बन गया है। सांसदों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर इस कार्रवाई को रोकने की मांग की है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई उच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत की जा रही है। इस विवाद में मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे भी शामिल हैं, जिससे लाखों लोगों के नाम हटाए गए हैं। जानें इस संवेदनशील मुद्दे पर और क्या हो रहा है।
 

लाउडस्पीकर विवाद का राजनीतिक पहलू


पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने का मुद्दा अब राजनीतिक विवाद का नया केंद्र बन गया है। इस विषय पर मुर्शिदाबाद के सांसद अबू ताहिर खान और जंगीपुर के सांसद खलीलुर रहमान ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की। सांसदों ने धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटाने पर चिंता व्यक्त करते हुए सरकार से कार्रवाई रोकने की मांग की। अबू ताहिर खान ने आरोप लगाया कि राज्य में मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई किसी विशेष समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह उच्च न्यायालय के निर्देशों और ध्वनि प्रदूषण से संबंधित नियमों के तहत की जा रही है।


बैठक में सांसदों ने दो प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की। पहला मुद्दा मतदाता सूची से संबंधित SIR प्रक्रिया थी, जिसमें लगभग 27 लाख लोगों के नाम हटाए गए हैं। अबू ताहिर खान ने कहा कि इनमें से कई लोग कामकाजी वर्ग के हैं और उन्हें सरकारी प्रक्रियाओं की जानकारी नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि इन लोगों के नाम फिर से सूची में शामिल किए जाएं।


दूसरा मुद्दा मस्जिदों में लाउडस्पीकर के उपयोग का था। अबू ताहिर खान ने कहा कि अजान के लिए लाउडस्पीकर हटाना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने सरकार से अपील की कि धार्मिक गतिविधियों में बाधा नहीं आनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कार्रवाई किसी एक धर्म को निशाना बनाकर नहीं की जा रही है, बल्कि यह उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार की जा रही है।


रिपोर्टों के अनुसार, अब तक लगभग 3,500 लाउडस्पीकर हटाए जा चुके हैं, जिनमें से 1,200 मंदिरों से जुड़े हैं। सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई सभी धार्मिक स्थलों पर नियमों के अनुसार की जा रही है। हालांकि, मुस्लिम समुदाय के कुछ नेताओं में नाराजगी बनी हुई है।


इस मुद्दे पर इंडियन सेक्युलर फ्रंट के विधायक नौशाद सिद्दीकी ने भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर बिना लिखित आदेश के पुलिस कार्रवाई कर रही है। इस प्रकार, यह मामला केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है।


मुख्यमंत्री से मुलाकात से पहले, दोनों सांसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मिल चुके हैं। इस समय यह मुलाकात हुई जब सांसदों के बीजेपी में शामिल होने की अटकलें थीं। हालांकि, अबू ताहिर खान ने स्पष्ट किया कि वह एनसीपी के साथ बने रहेंगे।


मुर्शिदाबाद के सांसदों की लगातार दिल्ली और राज्य स्तर पर शीर्ष नेताओं से मुलाकात ने बंगाल की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। एक ओर SIR प्रक्रिया में लाखों नामों का विवाद है, तो दूसरी ओर धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर हटाने का मुद्दा राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। अब देखना यह है कि सरकार इस कार्रवाई को कैसे आगे बढ़ाती है और क्या प्रभावित लोगों के लिए कोई राहत दी जाती है।