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पश्चिम बंगाल में लंबित 37 लाख अपीलें: चुनाव आयोग ने बढ़ाई न्यायाधिकरणों की संख्या की मांग

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से संबंधित 37 लाख से अधिक अपीलें लंबित हैं। चुनाव आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय से न्यायाधिकरणों की संख्या बढ़ाने की मांग की है, क्योंकि मौजूदा गति से इनका निपटारा करने में लगभग 12 साल लग सकते हैं। आयोग ने बताया कि 38.31 लाख अपीलों में से 90 प्रतिशत से अधिक मामलों में आवेदकों के नाम फिर से जोड़ दिए गए हैं। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया है और न्यायाधिकरणों की वर्तमान स्थिति क्या है।
 

पश्चिम बंगाल में अपीलों की स्थिति


नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से संबंधित 37 लाख से अधिक अपीलें अभी भी लंबित हैं। यदि वर्तमान गति बनी रही, तो इनका निपटारा करने में लगभग 12 साल लग सकते हैं। इस स्थिति को देखते हुए चुनाव आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय से न्यायाधिकरणों की संख्या बढ़ाने की गुहार लगाई है। आयोग ने अदालत में एक हलफनामा पेश करते हुए बताया कि अप्रैल के मध्य से अब तक न्यायाधिकरणों ने 1,26,194 अपीलों का निपटारा किया है। यदि सप्ताह के सभी दिनों को ध्यान में रखा जाए, तो यह लगभग 25 हजार मामलों के बराबर है।


16 सितंबर तक 37,05,235 अपीलें लंबित थीं। यदि यही गति जारी रही, तो सभी मामलों का निपटारा करने में लगभग 146 महीने यानी 12 साल से अधिक का समय लगेगा। आयोग ने हर संसदीय क्षेत्र के लिए एक न्यायाधिकरण स्थापित करने का सुझाव दिया है, क्योंकि पश्चिम बंगाल में कुल 42 संसदीय क्षेत्र हैं।


अपीलों की संख्या और नामों का विवरण

कितनी अपीलें दाखिल हुईं और कितने नाम जुड़े


कुल 38.31 लाख अपीलें दायर की गई थीं। इनमें से 22.21 लाख उन व्यक्तियों की हैं जिनके नाम सूची से हटा दिए गए थे और वे दोबारा शामिल होना चाहते हैं। शेष 16.10 लाख अपीलें नाम जोड़ने के निर्णय को चुनौती देती हैं। निपटाए गए 1,26,194 मामलों में से 1,13,943 यानी 90 प्रतिशत से अधिक मामलों में आवेदकों के नाम फिर से मतदाता सूची में जोड़ दिए गए हैं। चुनाव आयोग ने इस दावे का खंडन किया है कि एसआईआर में हटाए गए नामों ने विधानसभा चुनाव के परिणामों को प्रभावित किया। आयोग का कहना है कि कई क्षेत्रों में जीत के अंतर से अधिक नाम हटने के दावों में अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लिकेट प्रविष्टियों को नजरअंदाज किया गया है। हटाए गए वोटों और जीत के मार्जिन की तुलना को आयोग ने दोषपूर्ण बताया है।


न्यायाधिकरणों की वर्तमान स्थिति

फिलहाल 19 न्यायाधिकरण काम कर रहे हैं


वर्तमान में 19 न्यायाधिकरण अपीलों की सुनवाई कर रहे हैं। इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने आयोग से आंकड़े प्रस्तुत करने और निपटान प्रक्रिया को तेज करने के उपाय बताने को कहा था। अदालत ने समयबद्ध निपटारे पर जोर दिया था। कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने पूर्व न्यायाधीशों की अध्यक्षता में 19 न्यायाधिकरणों का गठन किया था। इसके अलावा, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड में लगभग 700 न्यायिक अधिकारियों को भी तैनात किया गया है।