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पश्चिम बंगाल सरकार ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की विरासत को संरक्षित करने की दिशा में उठाया बड़ा कदम

पश्चिम बंगाल सरकार ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की विरासत को संरक्षित करने के लिए उनके पैतृक निवास का अधिग्रहण किया है। इस संपत्ति को संग्रहालय और पुस्तकालय के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे नई पीढ़ी को उनके जीवन और योगदान के बारे में जानकारी मिल सकेगी। इस परियोजना का उद्देश्य डॉ. मुखर्जी की ऐतिहासिक विरासत को स्थायी पहचान देना है। जानें इस महत्वपूर्ण कदम के बारे में और क्या योजनाएं हैं सरकार की।
 

डॉ. मुखर्जी के पैतृक घर का अधिग्रहण


नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की सरकार ने भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की विरासत को संरक्षित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। हुगली जिले के जिराट गांव में उनके पैतृक निवास और उससे संबंधित संपत्ति का अधिग्रहण सफलतापूर्वक किया गया है। सरकार इस ऐतिहासिक स्थल को एक संग्रहालय, पुस्तकालय और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना बना रही है। इसका उद्देश्य डॉ. मुखर्जी के जीवन, उनके विचारों और योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।


अधिग्रहण की लागत और प्रक्रिया

राज्य सरकार ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की संपत्ति को 1 करोड़ 25 लाख 99 हजार 822 रुपये में खरीदा है। इस संपत्ति का कुल क्षेत्रफल 0.30179 एकड़ है। भूमि और भवन का मूल्यांकन पूरा होने के बाद सभी औपचारिकताएं पूरी की गईं। प्रशासनिक खर्च जोड़कर इस अधिग्रहण पर कुल लगभग 1 करोड़ 28 लाख रुपये खर्च हुए हैं।


कैबिनेट की मंजूरी से तेज हुई प्रक्रिया

तीन जून को राज्य मंत्रिमंडल ने संपत्ति खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसके बाद जिला स्तर पर बैठक आयोजित की गई और संपत्ति का पंजीकरण किया गया। तीन जुलाई को कोलकाता स्थित रजिस्ट्रार कार्यालय में रजिस्ट्री पूरी होने के बाद चारों उत्तराधिकारियों के बैंक खातों में राशि हस्तांतरित कर दी गई।


संग्रहालय और पुस्तकालय के रूप में विकास की योजना

सरकार का इरादा इस ऐतिहासिक भवन को एक आधुनिक संग्रहालय और पुस्तकालय के रूप में विकसित करने का है। इसके साथ ही परिसर का जीर्णोद्धार, पार्क, सभागार और आसपास के क्षेत्र का सौंदर्यीकरण भी किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे डॉ. मुखर्जी के जीवन और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को व्यापक रूप से प्रस्तुत किया जा सकेगा।


विरासत को मिलेगी नई पहचान

अब तक इस संपत्ति की देखरेख परिवार के सदस्य कर रहे थे। जिराट में उनके पिता सर आशुतोष मुखर्जी के नाम पर पहले से विद्यालय और पुस्तकालय मौजूद हैं, लेकिन डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर कोई बड़ा स्मारक नहीं था। इस परियोजना के बाद उनकी ऐतिहासिक विरासत को स्थायी पहचान मिलने की उम्मीद है।


बजट में विशेष प्रावधान

राज्य सरकार ने अपने पहले बजट में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर इस परियोजना सहित विभिन्न विकास कार्यों के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसी योजना के तहत कोलकाता में उनकी 125 फुट ऊंची प्रतिमा स्थापित करने का प्रस्ताव भी शामिल है। सरकार का कहना है कि यह पहल ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।