पाकिस्तान और सोमालिया के बीच रक्षा समझौता: क्षेत्रीय सुरक्षा पर प्रभाव
पाकिस्तान की बढ़ती क्षेत्रीय उपस्थिति
पाकिस्तान ने मध्य पूर्व और अफ्रीका में अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं। विशेष रूप से, लाल सागर के आसपास इस्लामाबाद का ध्यान केंद्रित है। पिछले वर्ष, सऊदी अरब के साथ एक रक्षा समझौता किया गया था, और 7 अगस्त को तुर्की भी इस समझौते में शामिल हो गया। तीनों देशों का दावा है कि यह समझौता किसी अन्य देश के खिलाफ नहीं है, लेकिन यह सवाल उठता है कि यदि ऐसा है, तो इसकी आवश्यकता क्यों पड़ी? मक्का रक्षा समझौते के बीच, पाकिस्तान ने सोमालिया के साथ भी एक महत्वपूर्ण समझौता किया है, जो सऊदी अरब और तुर्की के साथ हुए समझौतों की तुलना में कम चर्चा में है। आइए समझते हैं कि पाकिस्तान और सोमालिया के बीच यह रक्षा समझौता क्या है और इसका भारत पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।
सोमालिया के साथ रक्षा समझौता
पिछले वर्ष से यह चर्चा थी कि सोमालिया सऊदी अरब, पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र के साथ एक रक्षा समझौता करने जा रहा है। इसका उद्देश्य लाल सागर क्षेत्र में सऊदी अरब और तुर्की के प्रभाव को बनाए रखते हुए अपने हितों की रक्षा करना था। इस चर्चा को तब और बल मिला जब इजरायल ने सोमालिया से अलग हो चुके क्षेत्र सोमालीलैंड को मान्यता दी।
तुर्की की सोमालिया में रुचि
सऊदी अरब और तुर्की ने इजरायल के इस कदम को एक नए खतरे के रूप में देखा और इसकी निंदा की। उनका मानना है कि यदि इजरायल ने लाल सागर में अपनी उपस्थिति बढ़ाई, तो यह उनके हितों को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद, सऊदी अरब, मिस्र और तुर्की के नेताओं ने बैठक की, जिससे नए गठबंधन की नींव रखी गई। माना जा रहा है कि भविष्य में सोमालिया और मिस्र भी 'मक्का रक्षा समझौते' में शामिल होंगे।
पाकिस्तान के लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि सोमालिया और पाकिस्तान के बीच हुआ रक्षा समझौता तुर्की की पहल है। अंकारा इजरायल को घेरने के लिए नए गठबंधन बना रहा है, जिसमें पाकिस्तान को शामिल किया जा रहा है ताकि उसकी परमाणु छतरी का उपयोग इजरायल के खिलाफ किया जा सके। पाकिस्तान का उद्देश्य यह है कि भारत के साथ तनाव के समय वह वैश्विक मंच पर अलग-थलग न पड़े।
लाल सागर में नियंत्रण की होड़
4 अगस्त को इस्लामाबाद में पाकिस्तान और सोमालिया के बीच रक्षा समझौता हुआ। तीन दिन बाद, 7 अगस्त को 'मक्का रक्षा समझौता' हुआ। लाल सागर के एक तट पर तुर्की की सेना मौजूद है, जबकि दूसरे तट पर सऊदी अरब के साथ उसका रक्षा समझौता है। इससे तुर्की के हित पहले से अधिक सुरक्षित हो गए हैं।
भारत के हितों पर प्रभाव
भारत और इजरायल के बीच बढ़ता रक्षा और रणनीतिक सहयोग स्पष्ट है। अगले 10 वर्षों में इन रिश्तों को और मजबूत करने की योजना है। लेकिन यदि भविष्य में तुर्की या सोमालिया के साथ इजरायल का तनाव बढ़ता है, तो इसका असर भारत पर भी पड़ सकता है। लाल सागर के रास्ते भारत के कुल निर्यात का लगभग 15 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है।
हिंद महासागर में पाकिस्तान का दखल
भविष्य में पाकिस्तान के साथ संघर्ष की स्थिति में, इस्लामाबाद लाल सागर में भारत के खिलाफ बड़ी चाल चल सकता है। इसके अलावा, सोमालिया की सीमा हिंद महासागर से भी लगती है, जिससे पाकिस्तान का दखल बढ़ जाएगा।
भारत की सतर्कता
भारत इन समझौतों पर बारीकी से नजर रख रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि सोमालिया और पाकिस्तान के बीच हुए रक्षा समझौते पर ध्यान दिया जा रहा है।
सोमालिया-पाकिस्तान रक्षा समझौते का विवरण
सोमालिया के रक्षा मंत्रालय ने 4 अगस्त को एक प्रेस बयान में बताया कि सोमालिया गणराज्य और पाकिस्तान इस्लामी गणराज्य ने अपने रक्षा मंत्रालयों के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इसका उद्देश्य रक्षा, सुरक्षा और सैन्य क्षमता विकास में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करना है।