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पाकिस्तान का डबल गेम: ईरान के दुश्मनों को हथियार बेचकर बढ़ा रहा है मुनाफा

पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का फायदा उठाते हुए खाड़ी देशों को हथियारों की बिक्री शुरू कर दी है। इस्लामाबाद का दावा है कि वह मध्यस्थता कर रहा है, लेकिन खुफिया रिपोर्टों से पता चलता है कि वह ईरान के दुश्मनों को अत्याधुनिक ड्रोन और फाइटर जेट बेच रहा है। जानें कैसे यह स्थिति क्षेत्रीय संतुलन को प्रभावित कर सकती है और पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को सहारा दे सकती है।
 

पाकिस्तान की मध्यस्थता और हथियारों का व्यापार


नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच, पाकिस्तान खुद को शांति का मध्यस्थ बताने का प्रयास कर रहा है। वहीं, वह खाड़ी देशों को हथियार बेचकर अच्छा मुनाफा भी कमा रहा है। खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, इस्लामाबाद ईरान के विरोधियों को हथियारों की आपूर्ति कर रहा है।


इराक और कुवैत को 'लाइटनिंग-2' ड्रोन की बिक्री

सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान वर्तमान में इराक और कुवैत को अपने नए 'लाइटनिंग-2' ड्रोन की बिक्री कर रहा है। हाल ही में इसका परीक्षण भी किया गया है। यह ड्रोन साधारण नहीं है; 'लाइटनिंग-2' 300 किलो विस्फोटक लेकर 300 किलोमीटर की दूरी पर सटीक हमला कर सकता है।


आधुनिक युद्ध में इसे 'सुसाइड ड्रोन' के रूप में जाना जाता है, जो एयर डिफेंस सिस्टम, रडार और महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को नष्ट करने में सक्षम है।


JF-17 फाइटर जेट का बड़ा सौदा

खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने अज़रबैजान, कतर और यमन को JF-17 फाइटर जेट बेचने का सौदा भी पूरा कर लिया है। यह जेट पाकिस्तान और चीन के सहयोग से विकसित किया गया है और इसे पाकिस्तान वायुसेना की मुख्य ताकत माना जाता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान अब इसके और उन्नत संस्करण 'JF-17 ब्लॉक 4' पर भी काम कर रहा है, जिससे उसकी निर्यात क्षमता में वृद्धि होगी।


मध्यस्थता के पीछे का व्यापार

ईरान-अमेरिका विवाद में पाकिस्तान ने कई बार मध्यस्थता की पेशकश की है। इस्लामाबाद का दावा है कि वह दोनों देशों के बीच एक पुल बनना चाहता है। लेकिन पाकिस्तान की नीयत पर हमेशा सवाल उठते रहे हैं, क्योंकि उसके ईरान और अमेरिका दोनों के साथ रणनीतिक संबंध हैं।


इसके अलावा, चीन के साथ भी उसकी गहरी दोस्ती है। ऐसे में यह कहना मुश्किल है कि पाकिस्तान किसका समर्थन करेगा। ताजा घटनाक्रम से यह स्पष्ट हो गया है कि पाकिस्तान इस तनाव का लाभ उठाकर खाड़ी क्षेत्र में हथियारों का निर्यात बढ़ा रहा है।


क्षेत्रीय संतुलन में बदलाव की संभावना

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान के इस कदम से पश्चिम एशिया में शक्ति संतुलन बदल सकता है। इराक, कुवैत, और कतर जैसे देश, जो ईरान के विरोधी माने जाते हैं, अब पाकिस्तान से अत्याधुनिक हथियार प्राप्त कर रहे हैं। एक ओर, पाकिस्तान ईरान के साथ 'इस्लामी भाईचारे' की बात करता है, और दूसरी ओर, उसके विरोधियों को ड्रोन और फाइटर जेट बेचता है। यही पाकिस्तान का 'डबल गेम' है।


इस्लामाबाद को उम्मीद है कि हथियारों की बिक्री से उसे डॉलर मिलेंगे और उसकी कमजोर अर्थव्यवस्था को सहारा मिलेगा। लेकिन यह भी स्पष्ट है कि इससे क्षेत्र में हथियारों की होड़ और बढ़ेगी।