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पाकिस्तान का सऊदी अरब पर हमलों के बीच नया रुख

पाकिस्तान ने सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के हमलों के बीच अपने रुख में बदलाव किया है। एक दिन पहले सैन्य कार्रवाई की संभावना जताने के बाद, अब विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल कोई जवाबी कार्रवाई नहीं की जाएगी। रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के बयान के बाद यह नया रुख सामने आया है। जानें मक्का रक्षा समझौते के बारे में और पाकिस्तान की नई रणनीति क्या है।
 

पाकिस्तान का बदलता रुख

नई दिल्ली: सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के लगातार हमलों के बीच पाकिस्तान ने अपने रुख में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। एक दिन पहले सैन्य कार्रवाई की संभावना जताने के बाद, अब पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल किसी भी जवाबी सैन्य कार्रवाई पर विचार नहीं किया जा रहा है।


विदेश मंत्रालय का बयान

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सज्जाद हैदर खान ने साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि आवश्यकता पड़ने पर पाकिस्तान अपने रक्षा समझौते के अनुसार कदम उठाएगा, लेकिन इस समय सैन्य कार्रवाई का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।


रक्षा मंत्री का बयान

पाकिस्तान का यह नया रुख रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के बयान के बाद सामने आया है। आसिफ ने चेतावनी दी थी कि यदि यमन का संघर्ष सऊदी अरब तक पहुंचता है, तो संयुक्त रक्षा समझौते की सैन्य शर्तें लागू हो सकती हैं और पाकिस्तान अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटेगा।


हालांकि, उन्होंने यह भी कहा था कि समझौता मूल रूप से रक्षात्मक है और इसका उद्देश्य किसी अन्य देश के खिलाफ मनमाने तरीके से सैन्य कार्रवाई करना नहीं है।


मक्का रक्षा समझौता

पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच हुए संयुक्त रक्षा समझौते को ‘मक्का समझौता’ कहा जाता है। इसके तहत यदि किसी एक सदस्य देश पर हमला होता है, तो इसे बाकी सदस्यों पर भी हमला माना जा सकता है और तीनों देश मिलकर सुरक्षा के लिए कदम उठा सकते हैं।


इसी प्रावधान के चलते यह सवाल उठ रहा था कि सऊदी अरब पर हूती हमले बढ़ने की स्थिति में क्या पाकिस्तान अपनी सेना को उसके बचाव में भेज सकता है।


ईरान पर दबाव

इस बीच, पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने की कोशिश कर रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, इस्लामाबाद ने तेहरान से अपने सहयोगी हूतियों को सऊदी अरब पर हमले रोकने के लिए कहा है।


पाकिस्तान ने हूती हमलों की निंदा की है, लेकिन रक्षा समझौते के तहत वह आगे क्या कदम उठाएगा, इस पर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है।


गठबंधन का विस्तार नहीं

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि मौजूदा परिस्थितियों में ‘मक्का गठबंधन’ का विस्तार करने की कोई योजना नहीं है। ऐसे समय में जब मध्य पूर्व में तनाव बढ़ रहा है, पाकिस्तान का बदला हुआ रुख क्षेत्रीय संघर्ष में सीधे शामिल होने से बचने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।


हूती हमलों का कारण

यमन और सऊदी अरब के बीच लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष में सत्ता, क्षेत्रीय प्रभाव और सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दे शामिल हैं। हालिया हमलों में सऊदी शहरों और महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाए जाने से क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है।


लगातार बढ़ते हमलों ने बड़े क्षेत्रीय युद्ध की आशंका को फिर हवा दे दी है। साथ ही, सऊदी अरब जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देश की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ने से वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति और कीमतों पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।