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पाकिस्तान की आतंकवादी रणनीति में बदलाव: ऑपरेशन सिंदूर के बाद नई दिशा

पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद आतंकवादी संगठनों के लिए अपनी रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब, बड़े केंद्रीकृत ठिकानों के बजाय, छोटे प्रशिक्षण और संचालन केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि यदि किसी एक ठिकाने को नष्ट किया जाता है, तो अन्य ठिकानों से गतिविधियां जारी रह सकें। जानें इस बदलाव के पीछे के कारण और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
 

नई रणनीति का परिचय

नई दिल्ली: ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान के आतंकवादी ढांचे को हुए नुकसान के बाद, वहां की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने अपनी रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम), लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे संगठनों के लिए एक बड़े केंद्रीकृत ठिकाने के बजाय, पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों में छोटे प्रशिक्षण और संचालन केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं।


खुफिया आकलन और नई रणनीति

खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर में बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद के मुख्यालय और मुरीदके में लश्कर-ए-तैयबा के प्रशिक्षण केंद्र को निशाना बनाए जाने के बाद, पाकिस्तान ने यह समझा कि एक ही स्थान पर बड़े आतंकवादी ठिकाने रखना खतरनाक है। भारतीय सशस्त्र बलों ने इन ठिकानों को आसानी से नष्ट कर दिया था।


नई संरचना का निर्माण

आईएसआई ने तीनों संगठनों के प्रमुखों के साथ मिलकर एक नई रणनीति तैयार की है, जिसमें पाकिस्तान के विभिन्न स्थानों पर कई छोटे ठिकाने बनाने का निर्णय लिया गया है। यह कदम मुख्य कमांड या प्रशिक्षण केंद्र पर निर्भरता को समाप्त करने के लिए उठाया गया है।


प्रतीकात्मक पुनर्निर्माण

एक अधिकारी के अनुसार, जैश-ए-मोहम्मद ने अपने बहावलपुर मुख्यालय का तेजी से पुनर्निर्माण किया है, लेकिन वहां की गतिविधियां अब बहुत सीमित हैं। यह मुख्यालय अब केवल प्रतीकात्मक रूप से मौजूद है। अधिकारी ने कहा कि यदि इसका पुनर्निर्माण नहीं किया जाता, तो इससे पहले से ही हताश आतंकियों के मनोबल पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता था।


लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन की स्थिति

लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन के मामले में भी स्थिति समान है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद मुरीदके में लश्कर के प्रशिक्षण केंद्र का पुनर्निर्माण किया गया है, लेकिन खुफिया इंटरसेप्ट से पता चलता है कि वहां गतिविधियां काफी कम हैं। लश्कर ने अपने आतंकियों को यह संदेश देने के लिए इस केंद्र का तेजी से पुनर्निर्माण कराया कि उसका पुराना नेटवर्क अब भी सक्रिय है।


नई व्यवस्था का उद्देश्य

आईएसआई ने हिजबुल मुजाहिदीन के प्रशिक्षण केंद्र मार्कज राहील शहीद का भी पुनर्निर्माण कराया है, जो पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में स्थित है। इसके अलावा, सियालकोट में महमूना जया शिविर को भी हिजबुल मुजाहिदीन और आईएसआई ने फिर से तैयार किया है।


कम गतिविधियों का निर्देश

एक खुफिया अधिकारी ने बताया कि पुनर्निर्माण से जुड़े सभी इंटरसेप्ट इस बात का संकेत देते हैं कि इन केंद्रों को मुख्य रूप से प्रतीकात्मक रूप में बनाए रखा जाएगा। बड़े आतंकी हमलों की योजना और संचालन इन केंद्रों से नहीं किया जाएगा। आईएसआई ने इन शिविरों में प्रशिक्षण के दौरान बेहद कम गतिविधियां रखने और लो प्रोफाइल बनाए रखने का निर्देश दिया है।


संयुक्त कार्यप्रणाली

नई रणनीति के तहत, तीनों आतंकी संगठन अब एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करेंगे। इनके बीच पहले की तरह अलग-अलग जिम्मेदारियों का बंटवारा नहीं होगा और हमलों की योजना संयुक्त रूप से तैयार की जाएगी। हाफिज सईद, मसूद अजहर और सैयद सलाहुद्दीन जैसे नाम केवल प्रतीकात्मक और वैचारिक नेतृत्व तक सीमित रहेंगे, जबकि वास्तविक नियंत्रण आईएसआई के हाथों में होगा।


नए ठिकानों का विकास

अधिकारियों के अनुसार, इन संगठनों के सभी अभियानों और रोजमर्रा के कामकाज की निगरानी सीधे आईएसआई के ब्रिगेडियर इकबाल और कर्नल ओवैज कर रहे हैं। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि इन आतंकी संगठनों का कमांड सेंटर खैबर पख्तूनख्वा में स्थित है, जबकि प्रशिक्षण केंद्र पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों में फैले हुए हैं। इस्लामाबाद, रावलपिंडी, मुजफ्फराबाद और रावलकोट में नए प्रशिक्षण शिविर और संचालन केंद्र बनाए गए हैं।


आतंकियों की आवाजाही

इन शहरों में कोई एक बड़ा केंद्र नहीं है, बल्कि प्रत्येक स्थान पर चार से पांच अलग-अलग सुविधाएं विकसित की गई हैं। यहां आतंकियों को अलग-अलग स्तर पर प्रशिक्षण दिया जाता है। अधिकारी के मुताबिक, आतंकियों को अब किसी एक ठिकाने पर लंबे समय तक नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें लगातार अलग-अलग केंद्रों पर भेजा जाएगा। इससे उन्हें अलग-अलग जगहों का अनुभव मिलेगा और उनकी आवाजाही के कारण भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए उनकी गतिविधियों पर नजर रखना भी मुश्किल हो जाएगा।