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पाकिस्तान की नई रणनीति: भारत की राजनीति में घुसपैठ की कोशिश

जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई के चलते पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में घुसपैठ करने की नई रणनीति अपनाई है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, आईएसआई ने अपने समर्थक नेटवर्क को राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा, संदिग्ध तत्वों ने राजनीतिक दलों से जुड़ने का दावा किया है। एजेंसियों का मानना है कि आईएसआई स्थानीय असंतोष को बढ़ावा देने के लिए पुराने आतंकी संगठनों को पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रही है।
 

पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी की नई चाल

श्रीनगर- जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई से बौखलाए पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई अब भारत की लोकतांत्रिक प्रणाली में घुसपैठ करने की नई योजना बना रही है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, आईएसआई ने अपने समर्थक नेटवर्क और ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGWs) को मुख्यधारा की राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने के निर्देश दिए हैं, ताकि वे सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी से बच सकें और आतंकवादी तंत्र को नया रूप दे सकें।


राजनीतिक दलों से जुड़े संदिग्ध तत्व

हाल के महीनों में हुई कई गिरफ्तारियों और पूछताछ से यह संकेत मिले हैं कि कुछ संदिग्ध तत्व राष्ट्रीय स्तर की राजनीतिक पार्टियों से जुड़े होने का दावा कर रहे थे। जांच एजेंसियां इस पहलू की गंभीरता से जांच कर रही हैं।


आतंकवाद को स्थानीय आंदोलन के रूप में पेश करने की कोशिश

सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि आईएसआई का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों को सीमा पार से संचालित प्रॉक्सी युद्ध के बजाय स्थानीय असंतोष के रूप में प्रस्तुत करना है। इसके लिए ऐसे संगठनों को फिर से सक्रिय करने की कोशिश की जा रही है, जो 1990 और 2000 के दशक में घाटी में आतंक का प्रमुख चेहरा रहे थे।


पुराने आतंकी संगठनों को पुनर्जीवित करने का प्रयास

खुफिया रिपोर्टों में संकेत मिले हैं कि आईएसआई ने कुछ निष्क्रिय और कमजोर पड़ चुके आतंकी संगठनों को फिर से सक्रिय करने का प्रयास तेज कर दिया है। इनमें अल-उमर मुजाहिदीन, अल-बदर और तहरीक-उल-मुजाहिदीन जैसे संगठन शामिल हैं, जिन्होंने अतीत में जम्मू-कश्मीर में बड़े पैमाने पर हिंसा को अंजाम दिया था।


राजनीतिक पहचान का दुरुपयोग

अधिकारियों के अनुसार, कई मामलों में संदिग्ध तत्वों ने सुरक्षा जांच या तलाशी अभियान के दौरान खुद को किसी राजनीतिक दल से जुड़ा बताकर जांच से बचने की कोशिश की। हालांकि, एजेंसियों का कहना है कि किसी भी राजनीतिक दल की सदस्यता कानून से ऊपर नहीं है और यदि किसी व्यक्ति की आतंक या राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में संलिप्तता पाई जाती है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता

जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ जारी अभियानों और स्थानीय स्तर पर घटते समर्थन के कारण आईएसआई के नेटवर्क पर दबाव बढ़ा है। ऐसे में एजेंसियों का मानना है कि पाकिस्तान समर्थित तंत्र अब नए तरीकों से अपनी मौजूदगी बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।


सुरक्षा एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि, राजनीतिक आवरण में छिपे नेटवर्क या आतंकी फंडिंग के प्रयासों पर कड़ी नजर रखी जा रही है और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हर पहलू की गहन जांच की जा रही है।