पाकिस्तान की नई सूचना युद्ध रणनीति: भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा का मास्टर प्लान
पाकिस्तानी सेना की नई रणनीति
नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बार-बार असफलताओं का सामना करने के बाद, पाकिस्तान की सेना अब एक नई प्रकार की लड़ाई की तैयारी कर रही है। पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर में मिली हार के बाद, सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने अब हथियारों के बजाय मानसिक रणनीतियों का सहारा लिया है। आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान ने अपनी जनता की भूख मिटाने के बजाय एक खतरनाक सूचना अभियान शुरू किया है, जिसका उद्देश्य वैश्विक मीडिया के माध्यम से भारत की छवि को नुकसान पहुंचाना और अपने झूठे दावों को सही ठहराना है।
हार की प्रतिक्रिया और नैरेटिव युद्ध की योजना
हार की बौखलाहट और नैरेटिव वॉर का मास्टर प्लान
डिसइन्फो लैब की हालिया रिपोर्ट ने पाकिस्तान की इस गहरी साजिश का खुलासा किया है। ऑपरेशन सिंदूर में मिली शर्मनाक हार के बाद, पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व ने 2025 के लिए एक 'रणनीतिक संचार मास्टर प्लान' तैयार किया। इसका मुख्य उद्देश्य ऐसे अंग्रेजी भाषा के प्लेटफार्मों का निर्माण करना है, जो दिखने में निष्पक्ष और विश्वसनीय हों, लेकिन वास्तव में कश्मीर जैसे संवेदनशील मुद्दों पर पाकिस्तान के प्रोपेगेंडा को बढ़ावा दें। सेना की मीडिया विंग आईएसपीआर ने यह समझ लिया था कि उनका उर्दू-केंद्रित दृष्टिकोण वैश्विक स्तर पर प्रभावी नहीं हो रहा है, इसलिए उन्होंने इस नए मास्टर प्लान का सहारा लिया है।
प्रोपेगेंडा के लिए नए संस्थान
रिसर्च के नाम पर चल रहे सेना के प्रोपेगेंडा अड्डे
इस योजना को लागू करने के लिए पाकिस्तान ने कई नए तथाकथित रिसर्च संस्थान और थिंक टैंक स्थापित किए हैं। उदाहरण के लिए, लाहौर की मिन्हाज यूनिवर्सिटी में 'हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च एंड पॉलिसी स्टडीज' की स्थापना की गई है। यह संस्थान बाहरी दुनिया में एक अकादमिक संस्थान के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, जो हिमालयी भू-राजनीति, सुरक्षा और जलवायु पर काम करता है, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार, इसे पाकिस्तानी सेना और रणनीतिक नेटवर्क से जुड़े लोग संचालित कर रहे हैं। यहां अकादमिक रिसर्च की आड़ में भारत के खिलाफ दुष्प्रचार का काम किया जा रहा है।
न्यूट्रल मीडिया का उपयोग
न्यूट्रल मीडिया का मुखौटा पहनकर दुनिया को गुमराह करने की साजिश
थिंक टैंक के अलावा, पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया में अपनी घुसपैठ बढ़ाने के लिए भारी निवेश किया है। कराची का एशिया वन न्यूज, मैनचेस्टर का डीएम न्यूज इंग्लिश और पेरिस से संचालित एफपी92 टीवी और अफ्रीक1 टीवी जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म इसी प्रयास का हिस्सा हैं। ये सभी प्लेटफॉर्म खुद को निष्पक्ष पत्रकारिता का समर्थक बताते हैं, लेकिन वास्तव में इनके तार सीधे तौर पर पाकिस्तानी सेना से जुड़े हैं। पाकिस्तान जानता है कि सरकारी या सैन्य ठप्पे वाली खबरों पर विश्वसनीयता नहीं होती, इसलिए वह अब न्यूट्रल मीडिया के मुखौटे के पीछे छिपकर अपने नैरेटिव को स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।