पाकिस्तान की मध्यस्थता: अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर की कहानी
पाकिस्तान की भूमिका
इस्लामाबाद: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे गंभीर संघर्ष में पाकिस्तान ने अचानक एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभाई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने पाकिस्तान पर दबाव डाला कि वह ईरान को शांति के लिए मनाने में मदद करे। यहां तक कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की एक सोशल मीडिया पोस्ट, जिसमें इस मध्यस्थता का उल्लेख था, को अमेरिका ने पहले मंजूरी दी थी। हालांकि, इस पर आधिकारिक तौर पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। अब यह सवाल उठ रहा है कि अमेरिका को पाकिस्तान की इतनी आवश्यकता क्यों पड़ी।
ट्रंप की सीजफायर की इच्छा
28 फरवरी से शुरू हुआ यह संघर्ष मार्च के अंत तक भी समाप्त नहीं हुआ। डोनाल्ड ट्रंप को उम्मीद थी कि ईरान जल्द ही हार मान लेगा, लेकिन ईरान ने अमेरिका के कई सैन्य ठिकानों पर हमले किए। इस बीच, अमेरिका में युद्ध का खर्च बढ़ता गया और स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि ट्रंप के खिलाफ महाभियोग की बातें होने लगीं। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया, जिससे वैश्विक तेल संकट उत्पन्न हुआ और ट्रंप की चिंता बढ़ गई।
अमेरिका का दबाव
फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका हर हाल में ईरान के साथ सीजफायर चाहता था। ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान पर दबाव डाला कि वह ईरान को बातचीत के लिए राजी करे। इसी दबाव के परिणामस्वरूप, पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की अगुवाई में गुप्त वार्ताएं शुरू हुईं। इस कूटनीतिक प्रयास के बाद, तीनों देशों ने दो सप्ताह के सीजफायर पर सहमति जताई।
पाकिस्तान की आवश्यकता
ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में पाकिस्तान को धोखेबाज कहा था, लेकिन अब उनकी सोच बदल गई है। ट्रंप को पता था कि पाकिस्तान और ईरान के बीच अच्छे संबंध हैं और दोनों देशों की एक लंबी सीमा है। पाकिस्तान ने अपने कूटनीतिक चैनलों का उपयोग कर एक प्रभावी मध्यस्थ की भूमिका निभाई। इसके अलावा, आसिम मुनीर के ईरान की सेना के साथ मजबूत संबंध हैं, जो ईरान में महत्वपूर्ण निर्णय लेने में मदद करते हैं। अमेरिका को लगा कि किसी मुस्लिम देश के माध्यम से शांति प्रस्ताव भेजने पर ईरान उसे स्वीकार कर सकता है।
इस्लामाबाद में वार्ता
दो सप्ताह के सीजफायर के बाद, अमेरिका और ईरान की महत्वपूर्ण वार्ता इस्लामाबाद में होने जा रही है। इस बैठक पर पूरी दुनिया की नजर है, लेकिन लेबनान का मुद्दा अभी भी तनाव बढ़ा रहा है। इजरायल और अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि लेबनान इस सीजफायर समझौते का हिस्सा नहीं है, जबकि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने कहा था कि लेबनान भी इस प्रक्रिया में शामिल होगा। अब देखना यह है कि क्या यह बैठक मध्य पूर्व के संकट को सुलझा पाएगी।