पाकिस्तान की मिसाइल क्षमता पर अमेरिका की खुफिया एजेंसी की चिंता
पाकिस्तान की बढ़ती मिसाइल क्षमता
अमेरिका की खुफिया एजेंसी की प्रमुख तुलसी गबार्ड ने पाकिस्तान की बढ़ती बैलेस्टिक मिसाइल क्षमताओं पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि इस्लामाबाद जिस तेजी से अपनी मिसाइलों की मारक क्षमता को बढ़ा रहा है, उससे यह संभावना है कि ये मिसाइलें जल्द ही अमेरिका तक पहुंच सकती हैं। लगातार प्रतिबंधों और अंतरराष्ट्रीय अलगाव के बीच, पाकिस्तान का परमाणु हथियारों का विस्तार अब उत्तर कोरिया की स्थिति की तरह दिख रहा है, जिससे अमेरिका के लिए खतरा बढ़ रहा है.
आर्थिक संकट और आतंकी नेटवर्क
गबार्ड ने कहा कि पाकिस्तान में आर्थिक संकट के बावजूद आतंकी नेटवर्क सक्रिय हैं, और ऐसे में अमेरिका को और सख्त रुख अपनाने की आवश्यकता है।
नई बैलेस्टिक मिसाइलों का खतरा
उन्होंने 2026 के खतरे के आकलन में सीनेटरों को बताया कि पाकिस्तान की नई बैलेस्टिक मिसाइलें अब परमाणु या पारंपरिक हथियारों से लैस हैं, जिनकी मारक क्षमता महाद्वीपीय अमेरिका तक बढ़ रही है। यह एक महत्वपूर्ण बदलाव है, क्योंकि पहले पाकिस्तानी मिसाइलों को केवल दक्षिण एशिया तक सीमित माना जाता था.
तकनीकी उन्नति
पाकिस्तान केवल अपने परमाणु हथियारों की संख्या नहीं बढ़ा रहा, बल्कि उनकी तकनीक को भी आधुनिक बना रहा है। अबाबील जैसी मिसाइलों में एक साथ कई लक्ष्यों को निशाना बनाने की क्षमता विकसित की जा रही है। भारत के साथ प्रतिद्वंद्विता और चीन से मिली तकनीकी सहायता के कारण पाकिस्तान की सैन्य क्षमता अब केवल रक्षा जरूरतों तक सीमित नहीं रह गई है.
अमेरिका के प्रतिबंध
इस स्थिति को रोकने के लिए अमेरिका ने कुछ प्रतिबंध भी लगाए हैं। दिसंबर में, अमेरिकी ट्रेजरी ने पाकिस्तान की चार संस्थाओं पर कार्रवाई की थी, जिनमें नेशनल डेवलपमेंट कॉम्प्लेक्स शामिल था। इन पर मिसाइलों से जुड़े उपकरण हासिल करने का आरोप था. इसके बाद अप्रैल 2025 में 19 और कंपनियों पर भी प्रतिबंध लगाए गए, जिनमें कई कंपनियों के चीन से जुड़े सप्लाई नेटवर्क का उल्लेख किया गया.
आतंकी संगठनों की सक्रियता
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठन अब भी सक्रिय हैं, जिससे परमाणु सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ जाती है. ओसामा बिन लादेन का उदाहरण देते हुए कहा गया कि जिस देश में वह छिपा था, उस पर परमाणु हथियारों की सुरक्षा को लेकर भरोसा करना मुश्किल है.
अमेरिका की नीति में बदलाव की आवश्यकता
गबार्ड के अनुसार, अमेरिका को पाकिस्तान के मामले में अधिक सख्त नीति अपनाने की आवश्यकता है, क्योंकि आर्थिक संकट, मिसाइल कार्यक्रम और आतंकी ढांचे का यह मेल भविष्य में बड़ा खतरा बन सकता है.