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पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ की भारत को चेतावनी: पानी का मुद्दा है रेड लाइन

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भारत को पानी के मुद्दे पर कड़ी चेतावनी दी है, इसे पाकिस्तान के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा बताते हुए। उन्होंने सिंधु जल संधि को रेड लाइन कहा और स्पष्ट किया कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी पर कोई समझौता नहीं होगा। शरीफ ने कश्मीर पर पाकिस्तान के अडिग रुख को भी दोहराया और सेना प्रमुख की तारीफ की। जानें इस समझौते का इतिहास और भारत द्वारा इसे निलंबित करने के कारण।
 

कश्मीर पर पाकिस्तान का अडिग रुख


Shehbaz Sharif, इस्लामाबाद: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भारत को पानी के मुद्दे पर एक बार फिर कड़ी चेतावनी दी है। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर एक कार्यक्रम में शरीफ ने सिंधु जल संधि को पाकिस्तान के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा बताते हुए कहा कि भारत को अपने रुख पर पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी पर कोई समझौता नहीं होगा और यदि इसे रोकने या कम करने की कोशिश की गई, तो इसका कड़ा जवाब दिया जाएगा।


भारत को शांति का दुश्मन बताया

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, शरीफ ने कहा कि भारत ने संधि को एकतरफा और गैरकानूनी तरीके से रोककर खुद को शांति का दुश्मन साबित किया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के पानी की हर बूंद उसकी रेड लाइन है और इस मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।


कश्मीर पर अडिग रुख

कार्यक्रम में बोलते हुए, शहबाज शरीफ ने कहा कि कश्मीर पर पाकिस्तान का रुख कभी नहीं बदलेगा। उन्होंने सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की तारीफ करते हुए दावा किया कि उनके नेतृत्व में पाकिस्तान ने भारत को हराया।


सिंधु जल समझौता क्या है?

सिंधु जल समझौता भारत और पाकिस्तान के बीच नदियों के पानी का बंटवारा करता है। यह 19 सितंबर 1960 को भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान द्वारा हस्ताक्षरित किया गया था।


इस समझौते के तहत, सिंधु जल प्रणाली में पूरब की तीन नदियों का पानी भारत को और पश्चिम की तीन नदियों का पानी पाकिस्तान को दिया गया। भारत को रावी, ब्यास और सतलुज नदियों के पानी का उपयोग करने का अधिकार मिला, जबकि पाकिस्तान को सिंधु, झेलम और चिनाब नदियों का पानी दिया गया।


भारत ने जल संधि को निलंबित किया

यह संधि 65 वर्षों तक चलती रही, लेकिन 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने 23 अप्रैल को सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति की बैठक में सिंधु जल संधि को रोकने का निर्णय लिया।


भारत का कहना है कि जिन परिस्थितियों में यह समझौता हुआ था, वे अब पूरी तरह बदल चुकी हैं। नई दिल्ली ने स्पष्ट किया है कि सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान की ओर से विश्वसनीय और ठोस कार्रवाई होने तक संधि अपने मौजूदा स्वरूप में आगे नहीं बढ़ सकती।