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पाकिस्तान के सेना प्रमुख का ईरान दौरा: क्षेत्रीय शांति के लिए प्रयास

पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने हाल ही में ईरान का दौरा किया, जो अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस यात्रा का उद्देश्य क्षेत्रीय शांति और सहयोग को बढ़ावा देना है। रिपोर्टों के अनुसार, मुनीर के ईरान के सैन्य और खुफिया तंत्र के साथ गहरे संबंध हैं। हालांकि, अमेरिका में इन संबंधों को लेकर चिंता जताई जा रही है। जानें इस दौरे के दौरान हुई महत्वपूर्ण बैठकों और चर्चाओं के बारे में।
 

पाकिस्तान के सेना प्रमुख का महत्वपूर्ण दौरा

नई दिल्ली: पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर हाल ही में ईरान के तीन दिवसीय दौरे पर गए। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच, वह तेहरान पहुंचने वाले पहले प्रमुख विदेशी सैन्य नेता माने जा रहे हैं। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय शांति और सहयोग को बढ़ावा देना बताया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, मुनीर के ईरान के सैन्य और खुफिया तंत्र के साथ गहरे संबंध रहे हैं। जब वह 2016-17 में पाकिस्तान मिलिट्री इंटेलिजेंस के महानिदेशक थे, तब उन्होंने ईरान के साथ रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए थे।


हालांकि, अमेरिका में इन संबंधों को लेकर चिंता व्यक्त की जा रही है। फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज के सीनियर फेलो बिल रोगियो ने इसे एक 'रेड फ्लैग' करार देते हुए कहा कि अमेरिका को पाकिस्तान पर भरोसा करने में सतर्क रहना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में दोहरा खेल खेला और तालिबान का समर्थन किया।


रिटायर्ड पाकिस्तानी जनरल अहमद सईद का कहना है कि मुनीर ईरान के नेतृत्व, उसकी इंटेलिजेंस कम्युनिटी और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के साथ लगातार संपर्क में रहे हैं। उनके अनुसार, मुनीर के ईरान की नियमित सेना और खुफिया एजेंसियों के साथ भी मजबूत संबंध हैं। सईद ने यह भी दावा किया कि मुनीर के IRGC के वरिष्ठ कमांडरों, जिनमें कासिम सुलेमानी और हुसैन सलामी शामिल हैं, से करीबी संबंध रहे हैं।


दूसरी ओर, पाकिस्तानी विश्लेषक रजा रूमी का मानना है कि मुनीर जैसे सैन्य अधिकारियों का बढ़ता प्रभाव यह दर्शाता है कि पाकिस्तान में सेना का वर्चस्व अब भी नागरिक नेतृत्व पर भारी है। अपने दौरे के दौरान, आसिम मुनीर ने ईरान के राष्ट्रपति, विदेश मंत्री, संसद अध्यक्ष और सैन्य नेतृत्व से मुलाकात की। पाकिस्तानी सेना के बयान के अनुसार, इन बैठकों में क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा सहयोग और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा हुई।