पाकिस्तान में इमरान खान के समर्थकों का प्रदर्शन: खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल का ऐलान
खैबर पख्तूनख्वा में बिगड़ते हालात
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में राजनीतिक स्थिति तेजी से बिगड़ रही है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के समर्थक उनकी रिहाई की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं। इस बीच, पाकिस्तान की केंद्र सरकार ने इस प्रांत में आपातकाल लागू करने का निर्णय लिया है। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने मंत्रिमंडल की सिफारिश पर इस आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं। सरकार का कहना है कि क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की स्थिति गंभीर है और आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में प्रांतीय प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। दूसरी ओर, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने इस कदम को लोकतंत्र और जनता के जनादेश के खिलाफ बताया है। इससे केंद्र और इमरान खान की पार्टी के बीच पहले से चल रहे टकराव में और वृद्धि की संभावना है।
प्रांतीय प्रशासन पर केंद्र का नियंत्रण
पाकिस्तान के कानून मंत्री आजम नजीर तरार ने बताया कि खैबर पख्तूनख्वा की प्रांतीय सरकार का कामकाज फिलहाल निलंबित रहेगा। उन्होंने कहा कि स्थिति सामान्य होने तक प्रांत का प्रशासन गवर्नर के अधीन रहेगा और इसके लिए एक सलाहकार परिषद का गठन किया जाएगा। सरकार ने सुरक्षा चिंताओं और हाल के आतंकवादी हमलों को इस कदम का मुख्य कारण बताया है। हालांकि, विपक्ष ने इस निर्णय पर सवाल उठाए हैं। PTI के अध्यक्ष गौहर अली खान ने आपातकाल को गंभीर राजनीतिक गलती और अलोकतांत्रिक कदम करार दिया है, यह कहते हुए कि जनता ऐसे फैसलों को स्वीकार नहीं करेगी।
PTI नेताओं के गायब होने का आरोप
PTI ने आरोप लगाया है कि खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी, विधानसभा के स्पीकर बाबर सलीम स्वाति और पार्टी के प्रांतीय अध्यक्ष जुनैद अकबर खान को अगवा कर लिया गया है। पार्टी ने यह भी कहा कि हाल के हफ्तों में उसके कई राष्ट्रीय और प्रांतीय विधानसभा सदस्यों को जबरन उठाया गया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है, लेकिन इससे राजनीतिक माहौल और तनावपूर्ण हो गया है। यह मामला अब केवल सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद तक सीमित नहीं है, बल्कि निर्वाचित प्रतिनिधियों की सुरक्षा और राजनीतिक गतिविधियों की स्वतंत्रता पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
पेशावर में सुरक्षा कड़ी, नागरिकों को परेशानी
पेशावर में सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा किया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, मुख्यमंत्री के आवास के आसपास बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। शहर के कई हिस्सों में सड़कों को बंद कर दिया गया है, जिससे सार्वजनिक परिवहन सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। स्थानीय निवासियों ने बताया कि आवाजाही पर रोक लगने से उनकी दैनिक गतिविधियों में कठिनाई हो रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि आपातकाल के जरिए प्रांत के लोगों के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर किया जा रहा है, जबकि केंद्र सरकार का कहना है कि मौजूदा हालात में सुरक्षा सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है।
इमरान खान की रिहाई पर विवाद
पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं। उन पर भ्रष्टाचार और हिंसा भड़काने के आरोप लगाए गए हैं। इमरान खान और उनकी कानूनी टीम इन आरोपों को राजनीतिक प्रतिशोध बताते हुए खारिज कर चुके हैं। उनकी पार्टी के समर्थकों की मांगों में उन्हें अपने डॉक्टरों से मिलने की अनुमति देना भी शामिल है। रिपोर्टों के अनुसार, सरकार और PTI के बीच बातचीत टूटने के बाद प्रदर्शन और तेज हो गए हैं। पार्टी समर्थक पहले प्रांत में मार्च निकाल रहे थे और अब इस्लामाबाद तक पहुंचने की योजना बना रहे हैं।
पाकिस्तान की राजनीति में महत्वपूर्ण मोड़
खैबर पख्तूनख्वा को PTI का मजबूत राजनीतिक आधार माना जाता है। ऐसे में प्रांतीय सरकार के कामकाज को रोकने का निर्णय देश की राजनीति पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि केंद्र सरकार सुरक्षा के नाम पर प्रशासनिक नियंत्रण कितने समय तक अपने हाथ में रखती है और विपक्ष के साथ बातचीत की कोई नई पहल होती है या नहीं। फिलहाल, इमरान खान की रिहाई की मांग, आपातकाल और नेताओं के कथित तौर पर हिरासत में लेने के आरोप पाकिस्तान के राजनीतिक संकट को और जटिल बना रहे हैं।