पितृ पक्ष 2026: तिथियों और महत्व की जानकारी
पितृ पक्ष का महत्व
पितृ पक्ष 2026: हिंदू धर्म में, जब परिवार के बुजुर्ग का निधन होता है, तो उन्हें पितृ कहा जाता है। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, पितृ देवताओं को संतुष्ट करने से जीवन में सुख और शांति बनी रहती है। पितृ पक्ष का विशेष महत्व है, और इस दौरान दिवंगत पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान की परंपरा का पालन किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, मनुष्य जन्म से ही विभिन्न ऋणों के अधीन होता है, जिनमें देव ऋण, पितृ ऋण और ऋषि ऋण शामिल हैं। पितृ पक्ष में पिंडदान के माध्यम से पितरों को सम्मानित करना और उनका ऋण चुकाना आवश्यक है।
पितृ पक्ष 2026 की महत्वपूर्ण तिथियाँ
पितृ पक्ष 2026 प्रमुख तिथियां:
26 सितंबर 2026 (शनिवार): पूर्णिमा श्राद्ध
27 सितंबर 2026 (रविवार): प्रतिपदा श्राद्ध (पितृ पक्ष की शुरुआत)
28 सितंबर 2026 (सोमवार): द्वितीया श्राद्ध
29 सितंबर 2026 (मंगलवार): तृतीया श्राद्ध
30 सितंबर 2026 (बुधवार): चतुर्थी और पंचमी श्राद्ध
1 अक्टूबर 2026 (गुरुवार): षष्ठी श्राद्ध
2 अक्टूबर 2026 (शुक्रवार): सप्तमी श्राद्ध
3 अक्टूबर 2026 (शनिवार): अष्टमी श्राद्ध
4 अक्टूबर 2026 (रविवार): नवमी श्राद्ध
5 अक्टूबर 2026 (सोमवार): दशमी श्राद्ध
6 अक्टूबर 2026 (मंगलवार): एकादशी श्राद्ध
7 अक्टूबर 2026 (बुधवार): द्वादशी श्राद्ध
10 अक्टूबर 2026 (शनिवार): सर्वपितृ अमावस्या (समापन)