पीएम मोदी का स्वतंत्रता दिवस भाषण: नक्सलवाद और नई चुनौतियाँ
प्रधानमंत्री का संबोधन
नई दिल्ली. स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को लाल किले से देशवासियों को संबोधित किया। अपने भाषण में उन्होंने नक्सलवाद के खिलाफ मिली सफलताओं का जिक्र किया। पीएम ने कहा कि अब देश को 'दिमागी नक्सल' नामक एक नई चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
प्रधानमंत्री ने लोगों से अपील की कि उन्हें ऐसे 'दिमागी नक्सल' की पहचान करनी होगी और उन्हें समाज से अलग करना होगा। उन्होंने कहा कि यह राष्ट्र निर्माण का समय है और युवाओं को मुख्यधारा में लाकर एक विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ना होगा।
सुरक्षाकर्मियों की शहादत
पीएम मोदी ने नक्सलवाद के अतीत को उजागर करते हुए बताया कि इस समस्या ने देश को कई वर्षों तक प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा अभियानों में 3,500 से अधिक सुरक्षाकर्मियों ने अपनी जान गंवाई। यह संख्या युद्ध में मारे गए लोगों से भी अधिक है। पीएम ने 2014 में सत्ता संभालने के बाद नक्सलवाद को समाप्त करने के अपने संकल्प का भी उल्लेख किया।
नक्सलवाद का अंत
15 अगस्त को पीएम मोदी ने कहा कि माओवादी हिंसा अब अपने अंतिम चरण में है। कई क्षेत्र नक्सलवाद से मुक्त हो चुके हैं और वहां विकास तेजी से हो रहा है। उन्होंने सेना की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि जिन क्षेत्रों में नक्सलवाद के कारण विकास संभव नहीं था, वहां अब नई संभावनाएँ खुल रही हैं।
दिमागी नक्सल पर चेतावनी
पीएम मोदी ने चेतावनी दी कि नक्सली विचारधारा के समर्थक लंबे समय से सत्ता के गलियारों में मौजूद रहे हैं। उन्होंने कहा कि हथियारबंद नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, लेकिन कुछ लोग विचारधारा के माध्यम से समाज में अशांति फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे 'दिमागी नक्सल' की पहचान कर उन्हें अलग करना आवश्यक है।