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पीएम मोदी ने सोमनाथ मंदिर की यात्रा की यादें साझा कीं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर की अपनी पूर्व यात्राओं की यादें साझा कीं, जिसमें उन्होंने मंदिर पर हुए हमलों के बावजूद लोगों की आस्था की दृढ़ता को उजागर किया। उन्होंने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व की शुरुआत की घोषणा की और इसे यादों का त्योहार बताया। पीएम मोदी ने भारत माता के सपूतों को याद करने का पर्व मनाने की बात की और 2001 में हुए एक कार्यक्रम की झलकियां भी साझा कीं। इस लेख में जानें सोमनाथ मंदिर की ऐतिहासिकता और पीएम मोदी के विचार।
 

सोमनाथ मंदिर की सांस्कृतिक एकता


  • हमलों के बावजूद मंदिर ने भारत की सांस्कृतिक एकता की भावना को मजबूत किया


नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज अपने सोशल मीडिया पर सोमनाथ मंदिर की अपनी पूर्व यात्राओं की यादें साझा कीं। उन्होंने मंदिर पर हुए ऐतिहासिक हमलों के बावजूद लोगों की आस्था की दृढ़ता को उजागर किया। पीएम मोदी ने कहा कि सोमनाथ मंदिर पर कई बार हमले हुए, लेकिन ये हमले लोगों के आध्यात्मिक संकल्प को कमजोर नहीं कर सके। वह 11 जनवरी को सोमनाथ स्वाभिमान पर्व समारोह में भाग लेने के लिए सोमनाथ जाएंगे।


सोमनाथ मंदिर पर पहला हमला

1026 में मंदिर ने इतिहास में पहला हमला झेला


प्रधानमंत्री ने बताया कि हमलों ने देशवासियों को कमजोर नहीं किया, बल्कि इन घटनाओं ने भारत की सांस्कृतिक एकता को और मजबूत किया। सोमनाथ मंदिर को बार-बार पुनर्जीवित किया गया। जनवरी 1026 में, सोमनाथ मंदिर ने अपने इतिहास में पहला हमला झेला था, लेकिन इसके बाद भी हमारी आस्था अडिग रही।


सोमनाथ स्वाभिमान पर्व

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व 


प्रधानमंत्री ने कहा कि आज से सोमनाथ स्वाभिमान पर्व की शुरुआत हो रही है। उन्होंने इसे यादों का त्योहार बताया और कहा कि यदि किसी ने सोमनाथ का दौरा किया है, तो वह अपनी तस्वीरें #SomnathSwabhimanParv के साथ साझा करें।


भारत माता के सपूतों को याद करने का पर्व

भारत माता के अनगिनत सपूतों को याद करने का त्योहार


पीएम मोदी ने बताया कि यह पर्व उन अनगिनत सपूतों को याद करने का अवसर है जिन्होंने अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया। उन्होंने कहा कि चाहे समय कितना भी चुनौतीपूर्ण रहा हो, उनका संकल्प हमेशा अडिग रहा।


2001 के कार्यक्रम की झलकियां

2001 में आयोजित एक कार्यक्रम की झलकियां भी कीं शेयर


प्रधानमंत्री ने 31 अक्टूबर, 2001 को सोमनाथ में हुए एक कार्यक्रम की झलकियां साझा कीं, जो 1951 में मंदिर के पुनर्निर्माण की 50वीं वर्षगांठ पर आयोजित किया गया था। उन्होंने उस ऐतिहासिक समारोह को याद किया जिसमें तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद उपस्थित थे।