पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड का अंतिम संस्कार: आतंकियों की मौजूदगी से बढ़ी सुरक्षा चिंता
पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड का अंतिम संस्कार
इस्लामाबाद - पुलवामा हमले के मुख्य साजिशकर्ता हमजा बुरहान को अज्ञात बंदूकधारियों द्वारा गोली मारने के बाद पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में दफनाया गया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, उसके जनाजे में कई आतंकवादी और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के अधिकारी शामिल हुए।
इसमें हिज्बुल मुजाहिदीन के प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन और अल-बद्र के सरगना बख्त जमीन खान जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। हमजा बुरहान, जिसे अर्जुमंद गुलजार डार और कोडनेम 'डॉक्टर' के नाम से भी जाना जाता था, को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में गोली मारे जाने के एक दिन बाद दफनाया गया।
सोशल मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जनाजे में आतंकियों के अलावा आईएसआई से जुड़े अधिकारी भी मौजूद थे। वीडियो में दिख रहा है कि भारी हथियारों से लैस लोग एके-47 और अन्य आधुनिक हथियारों के साथ उपस्थित थे, जिससे समारोह के दौरान सुरक्षा व्यवस्था की कड़ी निगरानी का संकेत मिलता है।
बुरहान को 2019 के पुलवामा हमले का मुख्य साजिशकर्ता माना जाता है, जिसमें 40 से अधिक सीआरपीएफ जवान शहीद हुए थे। भारत के गृह मंत्रालय ने उसे 2022 में जम्मू-कश्मीर में कई आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में आतंकवादी घोषित किया था। अधिकारियों के अनुसार, वह युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने और पाकिस्तान संचालित अल-बद्र के लिए फंडिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था।
हाल के वर्षों में, वह पीओके में गुप्त रूप से रह रहा था और एक शिक्षक के रूप में काम कर रहा था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, वह मुजफ्फराबाद के एक निजी कॉलेज का प्रिंसिपल भी था। स्थानीय पुलिस के मुताबिक, गुरुवार सुबह कॉलेज परिसर से बाहर निकलते समय अज्ञात हमलावरों ने उस पर करीब से गोलीबारी की, जिसमें उसके सिर में कई गोलियां लगीं।
मई 2025 में भारत के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मारे गए आतंकियों के जनाजों में भी पाकिस्तानी सैन्य अधिकारी, नौकरशाह और आतंकी संगठन प्रमुख शामिल हुए थे। 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने गांव पर हमला कर लोगों से उनका धर्म पूछकर हत्या की थी, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी। इसके जवाब में भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया था। उस दौरान सामने आए वीडियो में लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) और जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) के मारे गए आतंकियों के ताबूतों को पाकिस्तानी झंडे में लपेटकर सैन्य सम्मान दिए जाने के दृश्य भी दिखाई दिए थे।