पेट्रोल-डीजल की कीमतों में फिर हुई वृद्धि, आम जनता पर पड़ेगा असर
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि: सोमवार को एक बार फिर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है। पेट्रोल की कीमत में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 2.71 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई है। पिछले दो हफ्तों में यह चौथी बार है जब तेल कंपनियों ने कीमतें बढ़ाई हैं। लगातार बढ़ती कीमतों ने आम जनता की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि इसका असर रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं पर भी पड़ने लगा है।
बड़े शहरों में नई कीमतें
नई वृद्धि के बाद, दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 95.20 रुपये प्रति लीटर हो गई है। अन्य शहरों में भी तेल की कीमतें काफी बढ़ गई हैं।
* कोलकाता – 113.51 रुपये
* मुंबई – 111.21 रुपये
* नोएडा – 101.90 रुपये
* बेंगलुरु – 110.60 रुपये
* भूवनेश्वर – 108.80 रुपये
* चंडीगढ़ – 101.50 रुपये
* जयपुर – 113.40 रुपये
* लखनऊ – 101.90 रुपये
* पटना – 113.50 रुपये प्रति लीटर
महंगाई का असर
महंगाई का असर: ईंधन की कीमतों में वृद्धि का असर केवल वाहनों तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले दिनों में कई आवश्यक वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ सकती हैं।
मालभाड़ा बढ़ने की संभावना: डीजल की कीमतों में वृद्धि से ट्रक और टेंपो का खर्च बढ़ेगा, जिसका सीधा असर दूसरे राज्यों से आने वाले फल, सब्जियां और राशन पर पड़ेगा।
खेती की लागत में वृद्धि: किसानों को ट्रैक्टर और पंपिंग सेट चलाने में अधिक खर्च करना पड़ेगा, जिससे खेती महंगी होगी और अनाज की कीमतें भी बढ़ सकती हैं।
सार्वजनिक परिवहन पर असर: सार्वजनिक परिवहन, स्कूल बस और ऑटो रिक्शा के किराए में भी वृद्धि देखने को मिल सकती है।
तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण
तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण: विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से वृद्धि इसका मुख्य कारण है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण क्रूड ऑयल की कीमत लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 100 डॉलर के पार पहुंच गई है।
कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि ने तेल कंपनियों पर आर्थिक दबाव डाला, जिसके परिणामस्वरूप कंपनियों ने कीमतों में वृद्धि का निर्णय लिया। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल और महंगे हो सकते हैं।
चुनाव से पहले मिली थी राहत
चुनाव से पहले राहत: मार्च 2024 से देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगभग स्थिर थीं। लोकसभा चुनाव से पहले सरकार ने जनता को राहत देते हुए दोनों ईंधनों पर 2 रुपये प्रति लीटर की कटौती की थी। हालांकि, भारत में तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुसार रोजाना कीमतें तय कर सकती हैं, लेकिन राजनीतिक और आर्थिक कारणों से लंबे समय तक रेट में बदलाव नहीं किया गया था।
तेल कंपनियों को हो रहा था नुकसान
तेल कंपनियों को नुकसान: सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियों को लगातार घाटा झेलना पड़ रहा था। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर कंपनियों को हर महीने लगभग 30 हजार करोड़ रुपये तक का नुकसान हो रहा था।
सरकार ने पहले घटाई थी एक्साइज ड्यूटी
सरकार ने एक्साइज ड्यूटी घटाई: कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए केंद्र सरकार ने 27 मार्च 2026 को पेट्रोल और डीजल पर स्पेशल एक्साइज ड्यूटी में 10-10 रुपये की कटौती की थी। इसके बाद पेट्रोल पर ड्यूटी 13 रुपये से घटकर 3 रुपये और डीजल पर 10 रुपये से घटकर शून्य के करीब पहुंच गई थी। केंद्र सरकार की ओर से एक लीटर पेट्रोल पर कुल 21.90 रुपये एक्साइज ड्यूटी वसूली जाती थी।
स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी घटने के बाद यह 11.90 रुपये रह गई थी। इसी तरह, एक लीटर डीजल पर कुल सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी 17.8 रुपये से घटकर 7.8 रुपये पर आ गई थी। सरकार का उद्देश्य उस समय जनता को राहत देना और बाजार में कीमतों को स्थिर रखना था, लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय हालात और बढ़ती क्रूड कीमतों ने फिर से तेल कीमतों में वृद्धि कर दी है।