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प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना में बदलाव: सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या में कमी

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है, जिसमें सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडरों की संख्या को कम किया गया है। अब लाभार्थियों को साल में केवल चार सिलेंडरों पर सब्सिडी मिलेगी, जबकि पहले यह संख्या नौ थी। यह निर्णय अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की बढ़ती कीमतों और कंपनियों पर बढ़ते वित्तीय दबाव के कारण लिया गया है। जानें इस बदलाव का लाखों परिवारों पर क्या असर पड़ेगा और सरकार का क्या कहना है।
 

महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा


प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन किया गया है, जो करोड़ों परिवारों को प्रभावित करेगा। केंद्र सरकार ने इस योजना के तहत मिलने वाले सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडरों की संख्या को कम करने का निर्णय लिया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। सरकार का कहना है कि बढ़ती लागत और तेल विपणन कंपनियों पर वित्तीय दबाव को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।


साल में केवल चार सिलेंडरों पर सब्सिडी

पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, अब उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को साल में केवल पहले चार सिलेंडरों पर ही सब्सिडी मिलेगी। प्रत्येक सिलेंडर पर 300 रुपये की सहायता सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाएगी। पहले इस योजना के तहत साल में 9 सिलेंडरों पर सब्सिडी मिलती थी। सरकार का कहना है कि योजना का उद्देश्य गरीब परिवारों को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराना है, और यह सहायता आगे भी जारी रहेगी। हालांकि, अब लाभ की संख्या सीमित हो जाएगी, जिससे उन परिवारों पर असर पड़ सकता है जो सालभर में अधिक गैस सिलेंडरों का उपयोग करते हैं।


वैश्विक कीमतों का प्रभाव

सरकार ने इस निर्णय के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति को मुख्य कारण बताया है। अधिकारियों के अनुसार, एलपीजी की वास्तविक लागत लगातार बढ़ रही है। पश्चिम एशिया में तनाव और आपूर्ति संबंधी समस्याओं के कारण वैश्विक बाजार में गैस की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, एलपीजी का अंतरराष्ट्रीय मानक मूल्य कुछ महीनों में काफी बढ़ गया है, जिसका सीधा असर भारत में गैस आयात की लागत पर पड़ा है। सरकार का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में उपभोक्ताओं को अभी भी वास्तविक लागत से कम कीमत पर सिलेंडर उपलब्ध कराया जा रहा है।


कंपनियों पर वित्तीय दबाव

पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि घरेलू गैस की आपूर्ति करने वाली सरकारी तेल कंपनियां लंबे समय से लागत और बिक्री मूल्य के बीच के अंतर का बोझ उठा रही हैं। सरकार के अनुसार, एक घरेलू गैस सिलेंडर की वास्तविक लागत उपभोक्ताओं द्वारा चुकाई जा रही कीमत से काफी अधिक है। इस अंतर को पूरा करने के लिए कंपनियों को भारी आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि घरेलू एलपीजी पर वित्तीय कमी पिछले वित्त वर्ष में काफी बढ़ गई है, जिसके कारण सरकार को कंपनियों के लिए विशेष वित्तीय सहायता की व्यवस्था करनी पड़ी।


लाखों परिवारों पर प्रभाव

उज्ज्वला योजना के तहत देश में करोड़ों गैस कनेक्शन दिए जा चुके हैं, और बड़ी संख्या में परिवार इस योजना का लाभ उठा रहे हैं। नई व्यवस्था के अनुसार, लाभार्थियों को पहले चार सिलेंडरों पर अतिरिक्त सहायता मिलेगी, जबकि उसके बाद सामान्य दर लागू होगी। सरकार का कहना है कि इसके बावजूद उज्ज्वला उपभोक्ताओं को पर्याप्त राहत मिलती रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती ऊर्जा कीमतों के दौर में यह निर्णय परिवारों के घरेलू बजट को प्रभावित कर सकता है। आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति और सरकार की नीति पर सभी की नजर बनी रहेगी.