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प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग के बीच महत्वपूर्ण वार्ता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच नई दिल्ली में हुई द्विपक्षीय वार्ता ने भारत-चीन संबंधों के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह मुलाकात सीमा विवाद, आर्थिक संबंधों और ब्रिक्स सहयोग पर केंद्रित रही। दोनों नेताओं ने आपसी सम्मान और स्थिरता पर जोर दिया, जिससे दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक नई शुरुआत हो सकती है। जानें इस वार्ता के प्रमुख बिंदुओं के बारे में।
 

प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात


नई दिल्ली में 2026 ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय चर्चा हुई। यह लगभग सात वर्षों में भारतीय भूमि पर दोनों नेताओं की पहली मुलाकात थी। विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और चीन को अपने संबंधों को 'रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण' से देखना चाहिए। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि दोनों एशियाई शक्तियों के संबंध 'पारस्परिक सम्मान, संवेदनशीलता और हित' के सिद्धांतों पर आधारित होने चाहिए।


सीमा पर शांति और स्थिरता का महत्व

बैठक में सीमा विवाद एक प्रमुख मुद्दा रहा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि द्विपक्षीय संबंधों के विकास के लिए सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना आवश्यक है। दोनों देशों ने सीमा से संबंधित मौजूदा समझौतों का पालन करने और सीमा प्रश्न का निष्पक्ष, उचित और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान खोजने की प्रतिबद्धता दोहराई। यह वार्ता 2020 में गल्वान घाटी की घटना के बाद उत्पन्न सैन्य गतिरोध को समाप्त करने और संबंधों को मजबूत करने के प्रयासों के तहत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


आर्थिक संबंधों और ब्रिक्स सहयोग पर चर्चा

दोनों नेताओं ने व्यापार संतुलन, आपूर्ति श्रृंखला के मुद्दों और एक-दूसरे के बाजारों तक पहुंच पर भी चर्चा की। इसके साथ ही, जन-सांख्यिकीय और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर सहमति बनी। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत के साथ मिलकर ब्रिक्स सहयोग को मजबूत करने और साझा विकास हासिल करने का आह्वान किया। पीएम मोदी ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता में चीन के सहयोग और 2026 शिखर सम्मेलन की सफलता में योगदान के लिए आभार व्यक्त किया।