प्रधानमंत्री मोदी का 76वां जन्मदिन: जीवन की प्रेरणादायक कहानियाँ
प्रधानमंत्री मोदी का जन्मदिन
प्रधानमंत्री मोदी का जन्मदिन: 17 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 76 वर्ष के हो जाएंगे। उनके नाम की पहचान केवल भारत में नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी है। उनके जीवन की कई प्रेरणादायक कहानियाँ हैं जो लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनती हैं। आइए, उनके जीवन की कुछ महत्वपूर्ण बातें जानते हैं।
पिता की चाय की दुकान
नरेंद्र मोदी अपने पांच भाई-बहनों में दूसरे स्थान पर हैं। बचपन में उन्हें नरिया के नाम से जाना जाता था। उनके पिता वड़नगर रेलवे स्टेशन पर चाय की एक छोटी दुकान चलाते थे। 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान, छोटे नरेंद्र स्टेशन पर आने वाले सैनिकों को चाय पिलाते थे, जो उनके सेवा भाव की शुरुआत थी।
साधु-संतों के प्रति आकर्षण
उन्होंने वड़नगर के भगवताचार्य नारायणाचार्य स्कूल में पढ़ाई की। स्कूल में वे औसत छात्र थे, लेकिन नाटक, वाद-विवाद और अभिनय में उनकी रुचि थी। उन्होंने कई पुरस्कार भी जीते। एनसीसी में भी उनकी भागीदारी रही। बचपन से ही साधु-संतों के प्रति उनका आकर्षण था और वे संन्यासी बनने का सपना देखते थे।
हिमालय में साधुओं के साथ समय बिताना
स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद, नरेंद्र घर से निकल पड़े और पश्चिम बंगाल के रामकृष्ण आश्रम सहित कई स्थानों पर गए। उन्होंने हिमालय में साधुओं के साथ कई महीने बिताए। लगभग दो साल बाद घर लौटने पर उन्होंने संन्यास का रास्ता छोड़ने का निर्णय लिया।
आरएसएस से जुड़ाव
बचपन से ही उनका आरएसएस से जुड़ाव था। 1958 में दीपावली के दिन, गुजरात के पहले प्रांत प्रचारक लक्ष्मण राव इनामदार ने उन्हें बाल स्वयंसेवक की शपथ दिलाई। वे बहुत मेहनती थे और बड़े शिविरों के आयोजन में प्रबंधन का कार्य करते थे।
अठारह साल की उम्र में विवाह
हिमालय से लौटने के बाद, उन्होंने अपने भाई के साथ अहमदाबाद में चाय की दुकानें खोलीं। कठिनाइयों का सामना करते हुए चाय बेची। अठारह साल की उम्र में उनकी मां ने बांसकाठा जिले के राजोसाना गांव की जसोदा बेन से उनका विवाह कर दिया, लेकिन बाद में वे संघ के पूर्णकालिक प्रचारक बन गए।
अनुशासन और मेहनत
अहमदाबाद संघ मुख्यालय में रहते हुए, नरेंद्र मोदी ने खुद साफ-सफाई, चाय बनाना और बुजुर्ग नेताओं के कपड़े धोने जैसे छोटे काम किए। ये आदतें आज भी उनके व्यक्तित्व का हिस्सा हैं। वे पूर्ण शाकाहारी हैं और कभी सिगरेट या शराब का सेवन नहीं किया। समय के प्रति उनकी पाबंदी और केवल साढ़े तीन घंटे की नींद लेने की आदतें उनके अनुशासन और सेवा भाव को दर्शाती हैं।