प्रधानमंत्री मोदी का भावनात्मक लेख: सोमनाथ मंदिर की ऐतिहासिकता और पुनर्निर्माण
सोमनाथ मंदिर पर प्रधानमंत्री का विशेष लेख
नई दिल्ली: सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले हमले की एक हजारवीं वर्षगांठ के अवसर पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक विशेष और भावनात्मक लेख लिखा है। इस लेख में उन्होंने सोमनाथ को केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति, सभ्यता और अटूट आस्था का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि सोमनाथ का नाम सुनते ही गर्व का अनुभव होता है।
प्रधानमंत्री ने बताया कि गुजरात के प्रभास पाटन में स्थित सोमनाथ मंदिर भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में पहला है। द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र की पहली पंक्ति 'सौराष्ट्रे सोमनाथं च' इसकी महानता को दर्शाती है। उन्होंने धार्मिक मान्यताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सोमनाथ शिवलिंग के दर्शन से व्यक्ति के पाप समाप्त होते हैं और इच्छाएं पूरी होती हैं।
प्रधानमंत्री का लेख में उल्लेख
प्रधानमंत्री ने अपने लेख में जनवरी 1026 में हुए उस ऐतिहासिक आक्रमण का जिक्र किया, जब विदेशी आक्रांता महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर पर हमला किया था। उन्होंने इसे बर्बरता और विनाश का प्रतीक बताया, जिसने केवल एक मंदिर को ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के आत्मविश्वास को भी चोट पहुंचाई।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सोमनाथ की कहानी केवल विनाश की नहीं, बल्कि पुनर्निर्माण और साहस की है। बार-बार हुए हमलों के बावजूद हर पीढ़ी ने इसे फिर से खड़ा किया। यह भारत माता के संतानों की अटूट इच्छाशक्ति और आस्था का प्रमाण है। उन्होंने अहिल्याबाई होल्कर, स्वामी विवेकानंद और अन्य महान व्यक्तियों के योगदान को भी याद किया।
पुनर्निर्माण का उल्लेख
लेख में आजादी के बाद सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का विशेष उल्लेख किया गया है। प्रधानमंत्री ने बताया कि सरदार वल्लभभाई पटेल ने 1947 में इसके पुनर्निर्माण का संकल्प लिया था और 11 मई 1951 को मंदिर भक्तों के लिए खोला गया। इस अवसर पर तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद भी मौजूद थे।
प्रधानमंत्री ने सोमनाथ को भारतीय सभ्यता का प्रतीक बताते हुए कहा कि जो शाश्वत है, उसे नष्ट नहीं किया जा सकता। उन्होंने विश्वास जताया कि सोमनाथ की तरह भारत भी विकसित भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ता रहेगा।