प्रधानमंत्री मोदी का शिक्षा में समानता पर जोर, मैसूर में उद्घाटन समारोह
शिक्षा और समान अवसरों का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कर्नाटक के मैसूर में विवेक स्मारक और स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक युवा केंद्र का उद्घाटन करते हुए शिक्षा और समान अवसरों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत एक ऐसा राष्ट्र बनाने की दिशा में अग्रसर है, जहां सभी नागरिकों को भेदभाव के बिना शिक्षा और विकास के समान अवसर मिलें। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार की प्राथमिकता गरीब और वंचित वर्गों को समान अवसर प्रदान करना है।
शिक्षा में भेदभाव समाप्त करना
प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वामी विवेकानंद का मानना था कि देश के विकास के लिए शिक्षा और समानता आवश्यक हैं। उन्होंने बताया कि भारत इसी सिद्धांत पर आगे बढ़ रहा है। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि किसी भी छात्र के साथ भाषा, आर्थिक स्थिति या अन्य कारणों से भेदभाव न हो। उनका कहना था कि शिक्षा का अधिकार सभी तक समान रूप से पहुंचना चाहिए।
मातृभाषा में शिक्षा का महत्व
पीएम मोदी ने बताया कि अब मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई मातृभाषा में भी उपलब्ध है। इससे उन छात्रों को लाभ होगा जो अंग्रेजी के कारण पिछड़ जाते थे। उन्होंने कहा कि मातृभाषा में शिक्षा मिलने से भाषा के आधार पर भेदभाव कम होगा और अधिक छात्र अपनी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ सकेंगे।
21वीं सदी के अनुरूप शिक्षा प्रणाली
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार देश की शिक्षा प्रणाली को आधुनिक बना रही है ताकि युवा 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुसार तैयार हो सकें। उन्होंने नई तकनीक, कौशल विकास और आधुनिक शिक्षा पर जोर दिया, जिससे युवाओं को बेहतर अवसर मिलेंगे।
युवाओं से स्वामी विवेकानंद के विचारों को अपनाने की अपील
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने युवाओं से स्वामी विवेकानंद के विचारों को अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद का शिक्षा, समानता और राष्ट्र निर्माण का संदेश आज भी प्रासंगिक है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का लक्ष्य ऐसी शिक्षा प्रणाली बनाना है, जहां हर छात्र को बिना भेदभाव के सीखने और अपने सपनों को पूरा करने का समान अवसर मिले।