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प्रधानमंत्री मोदी की इजरायल यात्रा: सुरक्षा और कूटनीति का नया अध्याय

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 फरवरी 2026 को इजरायल के लिए अपनी महत्वपूर्ण यात्रा शुरू की। इस यात्रा ने सुरक्षा और कूटनीति के नए आयाम खोले हैं। पीएम मोदी का विमान 'एयर इंडिया वन' ने पाकिस्तान और ईरान के हवाई क्षेत्र का उपयोग नहीं किया, जिससे सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई। इस यात्रा के दौरान, लाखों लोगों ने उनकी उड़ान को ट्रैक किया। जानें इस यात्रा के पीछे की रणनीति और इसके वैश्विक महत्व के बारे में।
 

प्रधानमंत्री मोदी की इजरायल यात्रा की शुरुआत


नई दिल्ली : भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 फरवरी 2026 को इजरायल के लिए अपनी महत्वपूर्ण दो दिवसीय यात्रा शुरू की। पालम एयर फोर्स स्टेशन से उड़ान भरने के बाद, उनके विशेष विमान की गतिविधियों पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी रहीं। यह यात्रा न केवल कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि तकनीकी रूप से भी वैश्विक चर्चा का केंद्र बनी हुई है। तेल अवीव के बेन गुरियन एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंडिंग तक लाखों लोग डिजिटल माध्यमों से उनकी उड़ान पर नजर बनाए हुए थे।


दुनिया का सबसे ट्रैक किया जाने वाला विमान

आपको जानकर हैरानी होगी कि विमानों की रियल-टाइम लोकेशन बताने वाले प्लेटफॉर्म 'फ्लाइटरडार' के अनुसार, पीएम मोदी की उड़ान बुधवार को वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक ट्रैक की जाने वाली उड़ान बन गई। जब उनका विमान सऊदी अरब से जॉर्डन की सीमा में प्रवेश कर रहा था, तब लगभग 7,184 लोग उसे लाइव देख रहे थे। यह प्लेटफॉर्म विमानों की गति, ऊंचाई और रूट की सटीक जानकारी प्रदान करता है, जो इस यात्रा के प्रति वैश्विक उत्सुकता को दर्शाता है।


सुरक्षा के मद्देनजर विशेष हवाई मार्ग

प्रधानमंत्री के विमान ने सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए एक विशेष और लंबा हवाई मार्ग चुना। 'एयर इंडिया वन' ने पाकिस्तान और ईरान के हवाई क्षेत्र का उपयोग नहीं किया। दिल्ली से उड़ान भरने के बाद, विमान गुजरात के रास्ते अरब सागर पार कर ओमान पहुंचा, फिर सऊदी अरब के मध्य से होते हुए जॉर्डन पहुंचा और अंततः इजरायल की सीमा में दाखिल हुआ। इस रणनीतिक मार्ग चयन पर सुरक्षा विशेषज्ञों के बीच चर्चा हो रही है।


एयर इंडिया वन की विशेषताएँ

प्रधानमंत्री जिस 'एयर इंडिया वन' विमान से इजरायल पहुंचे, वह अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस बोइंग 777-300ईआर है। यह केवल एक साधारण विमान नहीं है, बल्कि यह हवा में उड़ता हुआ एक अभेद्य किला है। इसमें हाई-टेक कमांड सेंटर, सुरक्षित संचार प्रणालियाँ और उन्नत मिसाइल डिफेंस सिस्टम शामिल हैं। यह विमान विशेष रूप से भारत के उच्चाधिकारियों के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो किसी भी आपात स्थिति में सुरक्षित उड़ान और निरंतर संवाद सुनिश्चित करता है।


दिल्ली से तेल अवीव का सफर

प्रधानमंत्री ने 25 फरवरी की सुबह दिल्ली के पालम एयर फोर्स स्टेशन से इजरायल के लिए प्रस्थान किया। भारत से इजरायल की सीधी उड़ान का समय आमतौर पर लगभग 6 से 7 घंटे होता है। उनका विशेष विमान इजरायल के प्रमुख बेन गुरियन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सफलतापूर्वक लैंड हुआ। यात्रा के दौरान विमान की गति और मार्ग पर नजर रखने वाले हजारों लोगों के लिए यह एक अद्वितीय अनुभव रहा, क्योंकि विमान कई महत्वपूर्ण खाड़ी और अरब देशों के हवाई क्षेत्रों को पार कर रहा था।


यात्रा का कूटनीतिक महत्व

प्रधानमंत्री की यह दो दिवसीय यात्रा इजरायल और भारत के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है। जब विश्व के लोग उनके विमान को ट्रैक कर रहे थे, तब कूटनीतिज्ञ भारत की विदेश नीति के नए आयामों का विश्लेषण कर रहे थे। सुरक्षित लैंडिंग के साथ ही अब दोनों देशों के बीच रक्षा, तकनीक और व्यापार जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग की बड़ी उम्मीदें बढ़ गई हैं। इस यात्रा ने वैश्विक राजनीति में भारत के बढ़ते कद और प्रभाव को पुनः सिद्ध किया है।