प्रधानमंत्री मोदी के दिमागी नक्सल बयान पर सियासी हलचल
सियासी विवाद की शुरुआत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिमागी नक्सल संबंधी बयान ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। वहीं, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी इस बयान पर स्पष्टीकरण दिया है कि दिमागी नक्सल का संदर्भ किसे दिया गया है।
केंद्रीय मंत्री का स्पष्टीकरण
किरण रिजिजू ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्षी नेताओं को दिमागी नक्सल नहीं कहा। उन्होंने सोशल मीडिया पर यह भी बताया कि सरकार के अनुसार, दिमागी नक्सल शब्द उन लोगों के लिए प्रयोग किया गया है जो माओवादियों का समर्थन करते हैं और भारतीय संविधान को नहीं मानते।
किसे कहा गया दिमागी नक्सल?
रिजिजू ने बताया कि दिमागी नक्सल उन व्यक्तियों को संदर्भित करता है जो अलगाववादियों का समर्थन करते हैं और अनुच्छेद 370 के पक्ष में खड़े होते हैं। इसके अलावा, जो लोग भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र को देश से अलग करने की बात करते हैं, उन्हें भी इस श्रेणी में रखा गया है। चिकन नेक, जो पश्चिम बंगाल का एक संकरा गलियारा है, पूर्वोत्तर राज्यों को बाकी देश से जोड़ता है।
पी चिदंबरम की प्रतिक्रिया
पी चिदंबरम ने प्रधानमंत्री के बयान के बाद सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि उन्हें गर्व है कि वे दिमागी नक्सल हैं। चिदंबरम की इस टिप्पणी ने राजनीतिक विवाद को और बढ़ा दिया, जिसके बाद रिजिजू ने स्पष्ट किया कि मोदी ने विपक्षी नेताओं को दिमागी नक्सल नहीं कहा।
स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी का भाषण
प्रधानमंत्री मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से देश को संबोधित किया। उन्होंने माओवाद के खिलाफ सरकार की कार्रवाई का उल्लेख किया और कहा कि देश ने हथियारबंद नक्सलियों को समाप्त करने में सफलता प्राप्त की है। उन्होंने कहा कि कई वर्षों तक माओवादी सोच रखने वाले लोग सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे और उनके विचारों का प्रभाव कई संस्थानों और योजनाओं पर पड़ा।
प्रधानमंत्री का संदेश
मोदी ने कहा, 'हम देश को हथियारबंद नक्सलवाद से काफी हद तक मुक्त करने में सफल हुए हैं। हालांकि, दिमागी नक्सल अब भी मौके की तलाश में हैं और वे हिंसा के रास्ते खोज रहे हैं, जिससे देश को गलत दिशा में ले जाने की कोशिश कर रहे हैं।'