प्रधानमंत्री मोदी ने 12 साल के कार्यकाल पर जनता का आभार व्यक्त किया
प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त करना
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 12 साल के कार्यकाल के अवसर पर देशवासियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इतने लंबे समय तक मां भारती की सेवा करना, यह ईश्वर की विशेष कृपा है। उनके लिए जनता ही ईश्वर का रूप है, इसलिए उन्होंने सेवा कार्य को साधना के रूप में लिया है। यह साधना अकेले नहीं, बल्कि एक सामूहिक प्रयास है, जिसमें सभी साथियों का योगदान है। आज वह इस यात्रा के सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हैं।
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि आज का दिन उनके लिए विशेष रूप से यादगार है। वह अभिभूत और कृतज्ञ हैं। उन्होंने कहा कि 'चरैवेति-चरैवेति' के मंत्र का जाप करते हुए, इस राजनीतिक यात्रा में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में इतनी लंबी सेवा का अवसर मिलेगा। यह उनके लिए एक परम सौभाग्य है।
उन्होंने 2014 में एनडीए की जीत का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय देश के सामान्य नागरिक में एक नई आशा का उदय हुआ था। यह आशा सभी का दायित्व है। देशवासियों ने कांग्रेस के विश्वासघात के बाद अपना भरोसा एनडीए पर रखा था। आज उन्हें गर्व है कि एनडीए परिवार ने देश के विश्वास को मजबूत किया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस ने देश को कई घोटालों में फंसाया था। 2014 में एनडीए सरकार बनने के बाद देश ने देखा कि जब नीयत, नीति और निर्णय एक साथ होते हैं, तो विकास की गति तेज होती है। उन्होंने कहा कि अटल जी के नेतृत्व में पहली बार एनडीए सरकार आई थी, जिससे विकास की गति का अनुभव हुआ। लेकिन 2004 में देश फिर से अस्थिरता के दौर में चला गया।
पीएम ने कहा कि एनडीए के 12 वर्षों की एक बड़ी सफलता यह है कि देश कांग्रेस के कुचक्र से मुक्त हुआ है। कांग्रेस ने देश को लाचारगी और हीन भावना में डाल दिया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने धीमी विकास की प्रक्रिया को 'हिंदू ग्रोथ रेट' का नाम दिया, जबकि असल में इसे 'कांग्रेस ग्रोथ रेट' कहा जाना चाहिए था।
उन्होंने सवाल उठाया कि अगर 12 साल में इतना कुछ संभव है, तो दशकों तक क्यों नहीं हुआ? यह 'कांग्रेस ग्रोथ रेट' और 'एनडीए ग्रोथ रेट' का अंतर है। एक व्यवस्था लोगों को इंतजार कराती थी, जबकि आज की व्यवस्था परिणाम दिखाती है। इसलिए 2014 से 2026 की कहानी केवल आंकड़ों की नहीं, बल्कि उस भारत की कहानी है, जिसने अपनी पूरी क्षमता के साथ दौड़ने का निर्णय लिया है।