प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक बुलाई, युद्ध के प्रभाव पर चर्चा
विश्वव्यापी संकट के बीच बैठक का आयोजन
अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध ने वैश्विक स्तर पर हलचल मचा दी है। इसका प्रभाव भारत में भी महसूस किया जा रहा है, खासकर ऊर्जा आपूर्ति, आर्थिक सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा पर। इस स्थिति को देखते हुए, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज शाम 6 बजे सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बैठक का आयोजन किया है।
बैठक का उद्देश्य और चुनौतियाँ
इस बैठक में राज्यों की तैयारियों और योजनाओं की समीक्षा की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, इसका मुख्य ध्यान पश्चिम एशिया में चल रहे संकट से उत्पन्न चुनौतियों पर होगा। हालांकि, इस बैठक में पांच राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के मुख्यमंत्रियों को शामिल नहीं किया गया है।
कुछ मुख्यमंत्रियों की अनुपस्थिति का कारण
जानकारी के अनुसार, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी के मुख्यमंत्री इस बैठक में भाग नहीं लेंगे। इसका कारण यह है कि इन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, जिसके चलते चुनावी आदर्श आचार संहिता लागू हो चुकी है।
मंत्रिमंडल सचिवालय इन राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ अलग से बैठक करेगा, ताकि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके। यह बैठक मिडिल ईस्ट संघर्ष के संदर्भ में प्रधानमंत्री मोदी की पहली सीधी बातचीत है।
लोकसभा में पीएम मोदी का संदेश
बैठक से पहले, पीएम मोदी ने लोकसभा में कहा कि इस संघर्ष से उत्पन्न संकट दीर्घकालिक हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार इस चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है। पीएम मोदी ने इस संकट की तुलना कोविड-19 महामारी से की और सभी नागरिकों से एकजुटता और धैर्य के साथ इसका सामना करने का आग्रह किया।
उन्होंने बताया कि पिछले तीन सप्ताह से चल रहे युद्ध ने भारत के सामने आर्थिक, राष्ट्रीय और मानवीय सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं। उन्होंने संसद से एकमत और एकजुटता का संदेश देने की अपील की। देश में एलपीजी की समस्या बढ़ रही है और तेल की आपूर्ति को लेकर भी चिंता बढ़ रही है।