प्रधानमंत्री मोदी ने हरगिला पक्षी की कहानी से किया जागरूकता का आह्वान
हरगिला पक्षी का महत्व
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 जून को 'मन की बात' कार्यक्रम में असम के दुर्लभ हरगिला पक्षी के बारे में एक दिलचस्प किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि यह पक्षी पर्यावरण का रक्षक है और इसके माध्यम से प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है। पहले, असम के कई लोग इसे अशुभ मानते थे और जिस पेड़ पर यह घोंसला बनाता था, उसे काट देते थे। जीव वैज्ञानिक पूर्णिमा देवी बर्मन ने इस पक्षी के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाने का कार्य किया, जिसके परिणामस्वरूप लोगों की सोच में बदलाव आया।
हरगिला की भूमिका
मोदी ने बताया कि हरगिला मृत जानवरों को खाकर पर्यावरण को साफ रखने में सहायक है। पूर्णिमा देवी बर्मन ने गांव-गांव जाकर लोगों को इसके बारे में जानकारी दी, जिससे हरगिला अब असम का एक अनोखा प्रतीक बन चुका है।
हरगिला पक्षी की विशेषताएँ
हरगिला पक्षी को दुनिया के सबसे दुर्लभ पक्षियों में से एक माना जाता है। इसका नाम 'हड्डी निगलने वाला' है, जो इसके साहसी स्वभाव को दर्शाता है। यह पक्षी मृत जानवरों की हड्डियाँ और सड़ा-गला मांस खाकर पर्यावरण की सफाई में योगदान देता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, लगभग 80 प्रतिशत हरगिला पक्षी असम में पाए जाते हैं।
सकारात्मक बदलाव का प्रतीक
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज हरगिला के प्रति लोगों की सोच में बदलाव आया है, जो प्रेरणादायक है। अब कई गांवों के लोग इस पक्षी का संरक्षण कर रहे हैं, जो वैज्ञानिक जागरूकता का परिणाम है।
अशुभ मानने की परंपरा
असम में हरगिला को लंबे समय तक अशुभ माना जाता रहा। कुछ लोग इसके आकार और आदतों के कारण डरते थे। यह एक बड़ा मांसाहारी पक्षी है, जो सड़े-गले मांस और मृत जीवों को खाता है। इसे बीमारी और बुरी आत्माओं का प्रतीक समझा जाता था। 'हरगिला' नाम संस्कृत के 'हड्डी' और 'गिला' शब्दों से मिलकर बना है। अब यह पक्षी असम की पहचान बन चुका है।