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प्रल्हाद जोशी: शिक्षा मंत्रालय की नई चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार

प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिला है, जो कई महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। नई शिक्षा नीति को प्रभावी ढंग से लागू करना और NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं को सुरक्षित बनाना उनकी प्राथमिकता है। जानें उनके कार्यकाल के दौरान क्या बदलाव होंगे और शिक्षा प्रणाली में सुधार के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।
 

नई दिल्ली में शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी


नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार संभालना किसी भी मंत्री के लिए एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। पिछले 12 वर्षों में मोदी सरकार के दौरान इस मंत्रालय का नेतृत्व कई नेताओं ने किया है, लेकिन अब प्रल्हाद जोशी को यह जिम्मेदारी ऐसे समय में मिली है जब परीक्षा प्रणाली और शिक्षा सुधार के क्षेत्र में कई बड़ी चुनौतियाँ मौजूद हैं। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिला है, जिसके तहत उन्हें कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर त्वरित निर्णय लेने होंगे।


धर्मेंद्र प्रधान का कार्यकाल

मोदी सरकार के कार्यकाल में धर्मेंद्र प्रधान ने लगभग 1,845 दिनों तक शिक्षा मंत्री के रूप में कार्य किया। उनके बाद प्रकाश जावड़ेकर ने लगभग 1,059 दिन, स्मृति ईरानी ने करीब 771 दिन और रमेश पोखरियाल निशंक ने लगभग 769 दिन तक इस मंत्रालय का कार्यभार संभाला। अब प्रल्हाद जोशी के सामने सबसे बड़ी चुनौती नई शिक्षा नीति को प्रभावी ढंग से लागू करना है। इसके साथ ही NEET जैसी प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं को पारदर्शी और सुरक्षित तरीके से आयोजित करना भी उनकी जिम्मेदारी होगी।


शिक्षा मंत्रालय की चुनौतियाँ

नए मंत्री के सामने शिक्षा मंत्रालय में कई लंबित सुधारों को आगे बढ़ाने की चुनौती है। नई शिक्षा नीति के प्रावधानों को लागू करने के साथ-साथ सीबीएसई और एनसीईआरटी में भी आवश्यक बदलाव किए जाने की आवश्यकता है। पाठ्यक्रम को अद्यतन करना, परीक्षा प्रणाली में सुधार करना और मंत्रालय से जुड़े संस्थानों के कार्यों को अधिक प्रभावी बनाना भी आवश्यक होगा।


इसके अलावा, प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना भी जोशी की प्राथमिकताओं में शामिल हो सकता है। NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में हाल के विवादों ने परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। ऐसे में छात्रों का विश्वास पुनः स्थापित करना और परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित बनाना प्रल्हाद जोशी के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।


प्रल्हाद जोशी का परिचय

प्रल्हाद जोशी भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं। वह कर्नाटक की धारवाड़ लोकसभा सीट से 2004 से सांसद हैं और केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभा चुके हैं। उनका जन्म 27 नवंबर 1962 को कर्नाटक के विजयपुर में हुआ था। उनके पिता वेंकटेश जोशी भारतीय रेलवे में कार्यरत थे। प्रल्हाद जोशी एक मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं और उनके परिवार में तीन बेटियाँ हैं।


उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा रेलवे स्कूल और हुबली के न्यू इंग्लिश स्कूल से प्राप्त की। इसके बाद, उन्होंने कर्नाटक विश्वविद्यालय, धारवाड़ से जुड़े केएस आर्ट्स कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की। पढ़ाई के बाद, वह सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय हो गए और धीरे-धीरे राजनीति में अपनी पहचान बनाई। कई बार लोकसभा सांसद चुने जाने के बाद, प्रल्हाद जोशी भाजपा के संगठन और सरकार दोनों में महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभा चुके हैं। अब शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिलने के बाद उनकी प्रशासनिक क्षमता की परीक्षा होगी।


परीक्षा प्रणाली में बदलाव

NEET-UG परीक्षा में आने वाले समय में बड़े बदलाव की योजना बनाई जा रही है। वर्ष 2027 से इस परीक्षा को कंप्यूटर आधारित परीक्षा यानी CBT मोड में आयोजित करने का निर्णय पहले ही लिया जा चुका है। परीक्षा में पेपर लीक और अन्य गड़बड़ियों को रोकने के लिए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी NTA की पूरी व्यवस्था में सुधार किया जा रहा है। सरकार परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने पर जोर दे रही है।


अधिकारियों के अनुसार, NEET को साल में दो चरणों में आयोजित करने के विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निर्णय अभी बाकी है। सरकार का मानना है कि तकनीक के उपयोग और परीक्षा प्रक्रिया में बदलाव से गड़बड़ियों की संभावना कम की जा सकती है। छात्रों से प्राप्त सुझाव और फीडबैक को भी भविष्य की परीक्षा व्यवस्था में शामिल करने की योजना है।