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प्रवर्तन निदेशालय की ताकत में वृद्धि: कर्मचारियों की संख्या में 60% इजाफा

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग के बढ़ते मामलों के मद्देनजर अपने कर्मचारियों की संख्या में 60% की वृद्धि की है। इस कदम का उद्देश्य जांच की गति को तेज करना और लंबित मामलों को निपटाना है। ED के बजट में भी तेजी से वृद्धि हुई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार इस एजेंसी को और अधिक सशक्त बनाना चाहती है। जानें इस बदलाव के पीछे के कारण और आंकड़े।
 

प्रवर्तन निदेशालय की नई पहल

केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) पिछले कुछ वर्षों से चर्चा का विषय बनी हुई है। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, व्यवसायियों और अन्य व्यक्तियों के ठिकानों पर छापेमारी में यह एजेंसी सबसे आगे रही है। अब, ED की क्षमता को बढ़ाने के लिए, इसके कर्मचारियों और अधिकारियों की संख्या में लगभग 60 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। यह कदम मनी लॉन्ड्रिंग के बढ़ते मामलों और जांच के दायरे को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ वर्षों में ED का बजट भी तेजी से बढ़ा है, और अब इसका वार्षिक बजट एक हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।


कर्मचारियों की संख्या में वृद्धि

इस बार ED में सभी स्तरों पर अधिकारियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। चाहे वह कानूनी विभाग हो, एडजुडिकेशन हो या सिस्टम और सिक्योरिटी, सभी क्षेत्रों में पदों की संख्या बढ़ाई गई है। अधिकारियों के साथ-साथ ग्राउंड ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों की संख्या में भी इजाफा किया गया है, जो छापेमारी और पूछताछ का कार्य करते हैं।


धोखाधड़ी के मामलों में वृद्धि

सरकार का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल लेन-देन के माध्यम से धोखाधड़ी के मामले तेजी से बढ़े हैं। मनी लॉन्ड्रिंग और विदेशी मुद्रा में गड़बड़ी के मामलों में वृद्धि के कारण PMLA और FEMA के तहत कई मामले दर्ज किए गए हैं, लेकिन आगे की कार्रवाई में देरी हो रही है। इसी कारण से अब पदों की संख्या बढ़ाई गई है।


कितने पद बढ़ाए गए?

अडिशनल डायरेक्टर- 10 से बढ़ाकर 24
ज्वाइंट डायरेक्टर- 28 से बढ़ाकर 49
डिप्टी डायरेक्टर- 148 से बढ़ाकर 267
असिस्टेंट डायरेक्टर- 255 से बढ़ाकर 531
एनफोर्समेंट ऑफिसर- 355 से बढ़ाकर 606
असिस्टेंट एन्फोर्समेंट ऑफिसर- 425 से बढ़ाकर 803


ED की ताकत बढ़ाने के कारण

ED को इतनी शक्ति देने के पीछे कुछ महत्वपूर्ण कारण हैं। पिछले कुछ वर्षों में देखा गया है कि मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित कानूनों को सख्त बनाने, लगातार छापेमारी करने और मुकदमे दर्ज करने के बावजूद, ED सजा दिलाने में असफल रही है। कई मामलों में कानूनी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाई है और हजारों मामले अभी भी लंबित हैं। यही कारण है कि ED के अधिकारियों और कर्मचारियों की संख्या में 60 प्रतिशत की वृद्धि की गई है।


छापेमारी और सजा में अंतर

पिछले पांच वर्षों में 9964 स्थानों पर छापेमारी की गई और कुल 903 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इन मामलों में 4377 एनफोर्समेंट केस इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट (ECIR) दर्ज की गईं। हालांकि, PMLA कोर्ट में केवल 1245 प्रोसेक्यूशन कंप्लेंट दाखिल की गईं। यह आंकड़ा छापेमारी की तुलना में बहुत कम है।


काम में देरी के कारण

ED के प्रमुख राहुल नवीन ने स्वीकार किया है कि कई सालों से कई केस लंबित पड़े हैं। उन्होंने कहा कि PMLA के कई केस कई वर्षों से लंबित हैं और इस साल उनका लक्ष्य जांच पूरी करने और प्रोसेक्यूशन कंप्लेंट फाइल करने पर केंद्रित होना चाहिए।