प्रवासी भारतीय दिवस: भारतीय डायस्पोरा का योगदान और महत्व
प्रवासी भारतीयों की भूमिका
नई दिल्ली: प्रवासी भारतीयों ने भारत की वैश्विक पहचान को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विश्व के विभिन्न हिस्सों में बसे भारतीयों ने न केवल आर्थिक योगदान किया है, बल्कि भारत की संस्कृति, मूल्यों और कूटनीतिक संबंधों को भी मजबूती प्रदान की है। इन योगदानों को मान्यता देने के लिए हर साल 9 जनवरी को प्रवासी भारतीय दिवस मनाया जाता है। यह दिन भारतीय डायस्पोरा और उनकी मातृभूमि के बीच भावनात्मक और रणनीतिक संबंधों को नई ऊर्जा प्रदान करता है.
प्रवासी भारतीय दिवस की स्थापना
प्रवासी भारतीय दिवस की शुरुआत कब हुई?
इस दिवस की शुरुआत भारत सरकार ने 2003 में की थी। यह विदेश मंत्रालय का एक प्रमुख कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य विश्वभर में बसे भारतीयों को एक साझा मंच प्रदान करना है। प्रारंभ में यह आयोजन हर वर्ष होता था, लेकिन 2015 के बाद इसे हर दो वर्ष में एक बार आयोजित करने का निर्णय लिया गया, ताकि इसे अधिक प्रभावी और व्यापक बनाया जा सके.
9 जनवरी का महत्व
9 जनवरी की तारीख क्यों चुनी गई?
9 जनवरी का दिन भारतीय इतिहास में विशेष महत्व रखता है। इसी दिन 1915 में महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे थे, जिसने स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी। गांधीजी स्वयं प्रवासी भारतीय थे और उनके अनुभवों ने भारत के संघर्ष को वैश्विक स्वर दिया। इसी ऐतिहासिक महत्व के कारण 9 जनवरी को प्रवासी भारतीय दिवस के रूप में चुना गया.
प्रवासी भारतीय दिवस का उद्देश्य
प्रवासी भारतीय दिवस का उद्देश्य क्या है?
इस दिवस का मुख्य उद्देश्य प्रवासी भारतीयों के योगदान को मान्यता देना और उन्हें भारत के विकास से जोड़ना है। यह मंच शिक्षा, निवेश, तकनीक, संस्कृति और कूटनीति जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देता है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर के अनुसार, भारतीय डायस्पोरा भारत की सॉफ्ट पावर का मजबूत आधार है और देश के दीर्घकालिक लक्ष्यों में उनकी भागीदारी अत्यंत आवश्यक है.
2025 का आयोजन और इसकी थीम
2025 का आयोजन और इसकी थीम
प्रवासी भारतीय दिवस का 18वां संस्करण ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में आयोजित किया जाएगा। इसकी थीम है 'Diaspora's Contribution to a Viksit Bharat'। इस आयोजन में विश्वभर से प्रवासी भारतीय नेता, उद्यमी और विशेषज्ञ भाग लेंगे। इससे पहले 2023 में इंदौर में आयोजित सम्मेलन की थीम 'अमृत काल में भारत की प्रगति के विश्वसनीय साझेदार' थी.
आयोजन का इतिहास
अब तक कहां-कहां हुए आयोजन?
प्रवासी भारतीय दिवस का आयोजन नई दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, चेन्नई, जयपुर, कोच्चि, गांधीनगर, बेंगलुरु, वाराणसी और इंदौर जैसे शहरों में हो चुका है। 2021 में यह आयोजन वर्चुअल रूप में किया गया था। हर आयोजन ने भारत और प्रवासी भारतीयों के रिश्तों को नई दिशा दी और आपसी विश्वास को और मजबूत किया.