प्रशांत किशोर की ऐतिहासिक जीत: बांकीपुर में बीजेपी का गढ़ ढहा
प्रशांत किशोर की जीत का महत्व
पटना: बिहार में हाल ही में हुए विधानसभा उपचुनाव में प्रशांत किशोर ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के उम्मीदवार नीरज कुमार को 19,324 मतों से हराकर एक महत्वपूर्ण जीत हासिल की। यह सीट बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष नितिन नबीन की थी, जिन्होंने पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद इसे छोड़ दिया था। इस हार ने बीजेपी के लिए एक बड़ा झटका दिया है, क्योंकि यह सीट उनके लिए एक मजबूत गढ़ मानी जाती थी। कायस्थ समुदाय के वोटरों की बहुलता वाली इस सीट पर किशोर की जीत बिहार की राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देती है।
प्रशांत किशोर का राजनीतिक सफर
प्रशांत किशोर, जिन्हें पीके के नाम से जाना जाता है, बिहार की राजनीति में एक प्रमुख चेहरा हैं। उन्हें कभी नीतीश कुमार का संभावित उत्तराधिकारी माना गया था, लेकिन विचारधारात्मक मतभेदों के कारण उनके बीच दूरी बढ़ गई। किशोर ने नीतीश कुमार को सीधी चुनौती दी है। उनकी पार्टी 'जन सुराज' ने 2025 के विधानसभा चुनाव में कोई सीट नहीं जीती, लेकिन उनका उत्साह अभी भी बरकरार है।
प्रशांत किशोर का जन्म 1977 में बिहार के रोहतास जिले में हुआ था। उन्होंने बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (BBA) और मास्टर ऑफ हेल्थ केयर मैनेजमेंट (MHA) की पढ़ाई की। उनके पिता एक डॉक्टर थे और उनकी पत्नी गुवाहाटी की रहने वाली चिकित्सक हैं।
राजनीतिक रणनीतिकार के रूप में योगदान
प्रशांत किशोर ने कई प्रमुख राजनीतिक दलों के लिए रणनीतिकार के रूप में काम किया है, जिनमें बीजेपी, जेडीयू, कांग्रेस, और अन्य शामिल हैं। उन्होंने कई चुनावी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जैसे कि पंजाब विधानसभा चुनाव 2017 और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021।
उनका पहला बड़ा राजनीतिक अभियान 2011 में था, जब उन्होंने नरेंद्र मोदी को गुजरात में तीसरी बार मुख्यमंत्री बनाने में मदद की। इसके बाद, उन्होंने 'सिटिज़न्स फॉर अकाउंटेबल गवर्नेंस' नामक एक चुनावी समूह की स्थापना की, जिसने 2014 के आम चुनाव में बीजेपी को जीत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
जन सुराज पार्टी की स्थापना
प्रशांत किशोर ने 2022 में 'जन सुराज' नामक एक राजनीतिक दल की स्थापना की। उन्होंने बिहार में 3,000 किलोमीटर की पदयात्रा की योजना बनाई, जिसका उद्देश्य आम जनता से संवाद स्थापित करना था। हालांकि, उनकी पार्टी को 2025 के विधानसभा चुनाव में कोई सफलता नहीं मिली।
उन्होंने 2018 में जनता दल (यूनाइटेड) में शामिल होकर पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का पद संभाला, लेकिन 2020 में मतभेदों के कारण उन्हें निष्कासित कर दिया गया।