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प्रियंका देवी की सफलता: नमो ड्रोन दीदी योजना से मिली नई पहचान

प्रियंका देवी की कहानी नमो ड्रोन दीदी योजना के माध्यम से आत्मनिर्भरता की नई ऊँचाइयों तक पहुँचने की प्रेरणा देती है। इस योजना ने न केवल प्रियंका की जिंदगी बदली, बल्कि कई अन्य महिलाओं के लिए भी नए अवसर खोले हैं। जानें कैसे ड्रोन तकनीक ने कृषि में बदलाव लाया और प्रियंका ने अपने क्षेत्र में एक नई पहचान बनाई।
 

नमो ड्रोन दीदी योजना: आत्मनिर्भरता की नई उड़ान

प्रियंका देवी ने नमो ड्रोन दीदी योजना के माध्यम से आत्मनिर्भरता की नई दिशा में कदम बढ़ाया है। यह योजना महिलाओं को तकनीकी कौशल से जोड़ते हुए कृषि में तेजी से छिड़काव और बेहतर आय के अवसर प्रदान करती है।


घर से आसमान तक का सफर

कैथल के भानपुरा गांव की प्रियंका देवी की ज़िंदगी पहले घर की चार दीवारों तक सीमित थी, लेकिन आत्मनिर्भर बनने की चाह ने उन्हें नई दिशा दी। अब वे अपने क्षेत्र में 'ड्रोन दीदी' के नाम से जानी जाती हैं और कई महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुकी हैं।


ड्रोन की सहायता से वे गांवों में उर्वरक और रसायनों का छिड़काव करती हैं। शुरुआत में चुनौतियाँ थीं, लेकिन अब वे अपने परिवार के लिए आर्थिक सहारा बन चुकी हैं, और उनकी मासिक आय लगभग बारह हजार रुपये तक पहुँच गई है।


स्वयं सहायता समूह से मिली प्रेरणा

प्रियंका बताती हैं कि उनकी यात्रा आसान नहीं थी। उन्होंने गांव के स्वयं सहायता समूह से शुरुआत की, लेकिन कई लोगों ने उन पर ताने कसे। इसी दौरान उन्हें नमो ड्रोन दीदी योजना के बारे में जानकारी मिली।


उन्होंने प्रशिक्षण के लिए आवेदन किया और चयनित हो गईं। गुरुग्राम में 16 दिन का प्रशिक्षण पूरा करने के बाद जब वे गांव लौटीं, तो लोगों का नजरिया बहुत नहीं बदला। असली बदलाव तब आया जब उन्हें ऑटो ड्रोन मिला।


ड्रोन से बढ़ी आय और किसानों को लाभ

प्रियंका कहती हैं कि उन्होंने छोटे खेतों से काम शुरू किया और अब वे केवल दस मिनट में एक एकड़ में छिड़काव कर लेती हैं। इससे न केवल उनकी आय में वृद्धि हुई है, बल्कि किसानों को भी बड़ा लाभ मिला है।


पहले किसान खुद जाकर छिड़काव करते थे, लेकिन अब ड्रोन की मदद से यह कार्य सटीक और तेज़ी से हो रहा है। वे प्रति एकड़ तीन सौ रुपये चार्ज लेती हैं और उनके साथ एक सहयोगी भी होता है।


नमो ड्रोन दीदी योजना का आरंभ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 नवंबर 2023 को नमो ड्रोन दीदी योजना की शुरुआत की। इसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को तकनीकी ज्ञान देकर आत्मनिर्भर बनाना है।


इस योजना में शामिल होने के लिए महिलाओं का स्वयं सहायता समूह से जुड़ना आवश्यक है। प्रशिक्षण के बाद उन्हें ड्रोन और आवश्यक उपकरणों का पूरा पैकेज दिया जाता है।


महिलाओं के लिए नई संभावनाएँ

यह योजना न केवल प्रियंका की जिंदगी में बदलाव लाई है, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी नई उम्मीद और आत्मनिर्भरता के रास्ते खोले हैं। प्रियंका का आत्मविश्वास हर उस महिला के लिए प्रेरणा है जो कुछ नया करने का सपना देखती है।