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फारूक अब्दुल्ला के बयान से जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक हलचल

फारूक अब्दुल्ला के हालिया बयान ने जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक विवाद को जन्म दिया है। उन्होंने पाकिस्तान के कश्मीर मुद्दे को उठाने की सराहना की और केंद्र सरकार की नीयत पर सवाल उठाए। बीजेपी ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें माफी की मांग भी शामिल है। जानें इस विवाद के पीछे की पूरी कहानी और इसके राजनीतिक प्रभाव के बारे में।
 

फारूक अब्दुल्ला का विवादास्पद बयान


नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने हाल ही में एक बयान दिया है, जिसने राजनीतिक विवाद को जन्म दिया है। शनिवार को बारामूला में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए, उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कश्मीर मुद्दे को उठाकर यहां के लोगों की सुरक्षा कर रहा है। इसके साथ ही, उन्होंने केंद्र सरकार की नीयत पर भी सवाल उठाए।


दिल्ली से न्याय की उम्मीद पर सवाल

फारूक अब्दुल्ला ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का उल्लेख करते हुए कहा कि वह विभिन्न मंचों पर कश्मीर मुद्दे को उठाते हैं। उनके अनुसार, यदि पाकिस्तान ऐसा नहीं करता, तो केंद्र सरकार के इरादे कश्मीरियों के हित में नहीं होंगे। उन्होंने लोगों से अपने अधिकारों और पहचान की रक्षा के लिए एकजुट होकर आवाज उठाने का आग्रह किया।


बीजेपी की प्रतिक्रिया

फारूक अब्दुल्ला के बयान पर बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। जम्मू-कश्मीर बीजेपी अध्यक्ष सत शर्मा ने उनसे देश की जनता से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की। उन्होंने कहा कि भारत में सभी नागरिकों को अपनी बात कहने का अधिकार है और यदि अब्दुल्ला ऐसे बयान देते रहे, तो उन्हें पाकिस्तान जाकर बसने की सलाह दी।


रविंदर रैना का बयान

बीजेपी के पूर्व जम्मू-कश्मीर अध्यक्ष रविंदर रैना ने अब्दुल्ला के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान दशकों से जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है और आतंकियों को प्रशिक्षण और हथियार मुहैया कराता रहा है। विश्व हिंदू परिषद के नेता विनोद बंसल ने भी अब्दुल्ला की टिप्पणियों की आलोचना की, यह कहते हुए कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है।


अनुच्छेद 370 का मुद्दा

बीजेपी नेताओं ने अनुच्छेद 370 के हटने का जिक्र करते हुए कहा कि अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त कर दिया गया था। इसके बाद क्षेत्र को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किया गया। पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर मुद्दे को उठाता रहा है, जबकि भारत का स्पष्ट रुख है कि जम्मू-कश्मीर देश का अभिन्न हिस्सा है।


मुस्लिम एकता की अपील

बारामूला में अपने कार्यक्रम के दौरान, फारूक अब्दुल्ला ने बीजेपी शासित राज्यों में मुस्लिम समुदाय की संपत्तियों को गिराने का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन कार्रवाइयों में मुस्लिमों को निशाना बनाया जा रहा है और उन्होंने सभी मुसलमानों से एकजुट होकर अपने अधिकारों की रक्षा करने की अपील की। बीजेपी का कहना है कि अतिक्रमण और अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई धर्म के आधार पर नहीं, बल्कि नियमों के तहत की जाती है।


मीडिया पर आरोप

अब्दुल्ला ने कुछ मुख्यधारा के मीडिया संस्थानों पर सरकार के पक्ष में काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दबाव और आर्थिक लाभ के कारण पत्रकारिता की स्वतंत्रता प्रभावित हो रही है, और जो पत्रकार सरकार की आलोचना करते हैं, उन्हें पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ता है।