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फालता विधानसभा चुनाव में सुरक्षा की कमी से रद्द हुआ मतदान

उत्तर प्रदेश के आईपीएस अधिकारी अजयपाल शर्मा की विवादास्पद भूमिका के कारण फालता विधानसभा का चुनाव रद्द कर दिया गया है। शर्मा ने एक वायरल वीडियो में तृणमूल कांग्रेस के विधायक को चेतावनी दी, लेकिन मतदान के दौरान सुरक्षा की कमी के चलते भाजपा को पोलिंग एजेंट नहीं मिल सके। चुनाव आयोग ने अब 21 मई को नए सिरे से मतदान कराने का निर्णय लिया है। जानिए इस घटनाक्रम के पीछे की पूरी कहानी और इसके संभावित प्रभाव।
 

अजयपाल शर्मा की विवादास्पद भूमिका

उत्तर प्रदेश के आईपीएस अधिकारी अजयपाल शर्मा, जिन्हें कथित तौर पर इनकाउंटर स्पेशलिस्ट माना जाता है, को केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में पश्चिम बंगाल भेजा गया था। प्रारंभ में उनका नाम सूची में नहीं था, लेकिन बाद में उन्हें विशेष रूप से दक्षिण 24 परगना के फालता क्षेत्र में तैनात किया गया। जैसे ही शर्मा ने अपनी ड्यूटी शुरू की, उन्होंने एक वायरल वीडियो बनाया जिसमें उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के विधायक जहांगीर खान को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि मतदाताओं को धमकाने की कोई घटना हुई, तो परिणाम गंभीर होंगे।


मतदाता डर और सुरक्षा की कमी

इस वीडियो में यह दिखाया गया कि लोग विधायक का घर बताने से डर रहे हैं, जबकि क्षेत्र में उनके कार्यालयों की भरमार है। अजयपाल शर्मा ने एक कर्मचारी को फटकार लगाते हुए वीडियो बनवाया, जिसके बाद उस कर्मचारी का तबादला भी कर दिया गया। लेकिन इस नाटक के बावजूद, फालता विधानसभा के 285 बूथों में से लगभग 280 बूथों पर भाजपा को पोलिंग एजेंट नहीं मिल सके।


चुनाव आयोग का निर्णय

अजयपाल शर्मा की रीलबाजी के बावजूद, अर्धसैनिक बलों की मौजूदगी भी पोलिंग एजेंटों को सुरक्षा का भरोसा नहीं दिला सकी। इसके परिणामस्वरूप, चुनाव आयोग को फालता विधानसभा का चुनाव रद्द करना पड़ा है। अब वहां 21 मई को नए सिरे से मतदान होगा। मतदान के दौरान ईवीएम से छेड़छाड़ और मतदाताओं को धमकाने की घटनाओं के कारण यह निर्णय लिया गया। यदि अजयपाल शर्मा ने सुरक्षा सुनिश्चित करने पर ध्यान दिया होता, तो शायद चुनाव रद्द करने की नौबत नहीं आती।