फिल्म 'द इंडिया स्टोरी: स्लो पॉइजन इन प्रोग्रेस' पर विवाद और पेस्टिसाइड्स का मुद्दा
फिल्म का परिचय
बॉलीवुड के सितारे काजल अग्रवाल और श्रेयस तलपड़े की नई फिल्म 'द इंडिया स्टोरी: स्लो पॉइजन इन प्रोग्रेस' पिछले कुछ महीनों से चर्चा का विषय बनी हुई है। फिल्म के नाम के साथ ही विवादों की शुरुआत हो गई थी। रिलीज से पहले इसे कई कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, और सेंसर बोर्ड ने भी इसमें कई बदलाव किए। अंततः, 24 जुलाई को यह फिल्म रिलीज हुई और अब यह ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध है। सोशल मीडिया पर इस फिल्म के विषयों पर लोगों की मिश्रित प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।
फिल्म का विषय
चेतन डीके द्वारा निर्देशित इस फिल्म ने कीटनाशकों के उपयोग और उनके दुष्प्रभावों पर गंभीर चर्चा शुरू की है। यह एक सामाजिक और कोर्टरूम ड्रामा है, जो दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर करता है कि कैसे पेस्टिसाइड्स हमारे भोजन तक पहुंच रहे हैं और लोगों को गंभीर बीमारियों का शिकार बना रहे हैं। श्रेयस तलपड़े ने एक इंटरव्यू में बताया कि इस फिल्म के बाद उन्होंने दूध और पनीर का सेवन कम कर दिया है।
कानूनी विवाद
फिल्म के टीजर में पेस्टिसाइड्स, खाद्य सुरक्षा और कैंसर से संबंधित दावों के कारण विवाद उत्पन्न हुआ। जून 2026 में, एक वकील ने फिल्म के निर्माताओं को कानूनी नोटिस भेजा, जिसमें दावों के वैज्ञानिक आधार पर सवाल उठाए गए। इसके बाद एग्रो केम फेडरेशन ऑफ इंडिया ने भी CBFC को पत्र लिखकर जांच की मांग की।
निर्माताओं ने नोटिस का जवाब दिया और निर्देशक चेतन डीके ने कहा कि फिल्म का उद्देश्य पेस्टिसाइड्स के गलत उपयोग और उनके स्वास्थ्य पर प्रभावों पर सवाल उठाना है।
सरकार का कदम
फिल्म के विवाद के बीच, केंद्र सरकार ने पैराक्वाट डाइक्लोराइड पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया। जुलाई में, सरकार ने इस कीटनाशक पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का ड्राफ्ट आदेश जारी किया। 22 सितंबर 2026 को, सरकार ने इसके रजिस्ट्रेशन को प्रतिबंधित कर दिया। विशेषज्ञों ने इसके स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभावों के बारे में चिंता जताई थी।
पेस्टिसाइड्स के लिए नया कानून
सरकार पेस्टिसाइड्स के लिए नया कानून बनाने की योजना बना रही है। 30 दिसंबर 2025 को बिल का ड्राफ्ट मंत्रालयों और राज्यों को भेजा गया था। इसके लिए सुझाव मांगे गए और बाद में Pesticides Management Bill, 2026 का ड्राफ्ट तैयार किया गया।
पेस्टिसाइड्स की समस्या
11 अगस्त को, सरकार ने लोकसभा में 2023 से 2026 का डेटा प्रस्तुत किया। 23 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से 70,652 नमूनों की जांच की गई, जिनमें से 2,223 नमूनों में कीटनाशक की मात्रा तय सीमा से अधिक पाई गई।
गड़बड़ी वाले राज्यों की सूची:
- हरियाणा: 6.4%
- आंध्र प्रदेश: 6.4%
- तेलंगाना: 5.9%
- महाराष्ट्र: 4.9%
- दिल्ली: 4.3%
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कुल गड़बड़ नमूनों का आधा हिस्सा तीन राज्यों से है।