बंगाल में घुसपैठियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, बदलाव की लहर
घुसपैठियों की पहचान और निकासी का अभियान
भारत की सीमाओं से घुसपैठियों को निकालने का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। यह केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं है, बल्कि बिहार से लेकर राजस्थान तक यह अभियान सक्रिय है। पाकिस्तान और बांग्लादेश की सीमाओं से सटे राज्यों में बाड़ लगाई जा रही है और सुरक्षा को मजबूत किया जा रहा है।
बंगाल में बदलाव की लहर स्पष्ट दिखाई दे रही है। पिछले 50 वर्षों में जो संभव नहीं था, वह अब हो रहा है। ईद उल अजहा के अवसर पर कोलकाता की रेड रोड पर पहली बार कोई भीड़ नहीं थी। इसके बजाय, नमाज ब्रिगेड परेड ग्राउंड में अदा की गई। इस बार कुर्बानी के लिए प्रतिबंधित पशुओं की बलि नहीं दी गई।
सड़कों और रेलवे स्टेशनों पर अतिक्रमण हटाए जा रहे हैं, जिससे वातावरण साफ-सुथरा हो गया है। अवैध निर्माण पर बुलडोजर चल रहे हैं। यह सब कुछ ऐसा है, जिसकी कल्पना आम बंगाली नहीं कर सकता था। अब लोग देख रहे हैं कि कई लोग, जिनके पास भारतीय पहचान पत्र हैं, बांग्लादेश की सीमा पर जा रहे हैं।
बंगाल में हो रहे इस बदलाव को मुस्लिम समुदाय भी स्वीकार कर रहा है। बकरीद से पहले, मुस्लिम समाज के प्रबुद्ध लोगों ने अपने समुदाय से अपील की कि वे प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी न दें। यह दर्शाता है कि मुस्लिम समाज सह-अस्तित्व की व्यवस्था को स्वीकार करने के लिए तैयार है।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की भाषा और लहजा भी बदल रहा है। वे शांति से अपनी बात रखते हैं और लोगों से अपील करते हैं। उनके आचरण में प्रभावशीलता और दूरदर्शिता है। बकरीद के मौके पर उन्हें किसी भी प्रकार की बल प्रयोग की आवश्यकता नहीं पड़ी।
राष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर भी सुवेंदु सरकार सख्ती दिखा रही है। घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें सीमा से बाहर निकाला जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा है कि जो लोग स्वेच्छा से भारत छोड़ देंगे, उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।
केंद्रीय गृह मंत्री ने सीमांचल क्षेत्र में घुसपैठ और जनसंख्या संरचना का अध्ययन किया है। यह स्पष्ट है कि कुछ क्षेत्रों में जनसंख्या वृद्धि कृत्रिम है, जिसे रोकना आवश्यक है।
कृत्रिम जनसंख्या वृद्धि से सामाजिक और सांस्कृतिक बदलाव हो रहे हैं, जो हिंदू धर्म और संस्कृति के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं। इस दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं और बंगाल इसमें अग्रणी भूमिका निभा रहा है।