बंगाल में निर्माणाधीन गोदाम ढहने से मचा हड़कंप, सरकार ने उठाए सख्त कदम
कोलकाता में निर्माणाधीन गोदाम का ढहना
कोलकाता: पश्चिम बंगाल के तारातला क्षेत्र में एक निर्माणाधीन गोदाम के ढहने की घटना ने राज्य सरकार को सख्त कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है। इस हादसे में पांच लोगों की जान चली गई और कई अन्य घायल हुए हैं। इसके बाद, राज्य सरकार ने कोलकाता और उसके आस-पास के क्षेत्रों में सभी निर्माणाधीन इमारतों की गहन जांच कराने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही, 31 जुलाई तक सभी निर्माण कार्यों पर अस्थायी रोक लगाने की घोषणा की गई है।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने घटना के बाद स्थिति की समीक्षा करते हुए कहा कि शहर में चल रहे निर्माण कार्यों की सुरक्षा और वैधता की जांच करना आवश्यक है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि कोलकाता के साथ-साथ हावड़ा और बिधाननगर में भी निर्माणाधीन इमारतों का तकनीकी ऑडिट किया जाए, ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय पर रोका जा सके।
विशेष जांच दल का गठन
सरकार के आदेश पर मुख्य सचिव की निगरानी में एक विशेष जांच दल बनाया जाएगा। इस टीम में पुलिस, अग्निशामक विभाग, लोक निर्माण विभाग, सिविल डिफेंस और नगर निकायों के अधिकारी शामिल होंगे। यह टीम विभिन्न निर्माण स्थलों का निरीक्षण कर संरचनात्मक सुरक्षा, स्वीकृत मानचित्र और निर्माण मानकों की जांच करेगी। विशेष रूप से व्यावसायिक परियोजनाओं और जलाशयों के आसपास के ढांचों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
हादसे का विवरण
तारातला में यह हादसा बुधवार दोपहर लगभग 12 बजे हुआ, जब निर्माणाधीन गोदाम का एक हिस्सा अचानक गिर गया। घटना के समय वहां बड़ी संख्या में मजदूर काम कर रहे थे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, 40 से 50 लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका जताई गई थी। राहत और बचाव कार्य के दौरान कई लोगों को सुरक्षित निकाला गया, जबकि पांच लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।
घायलों की स्थिति
मुख्यमंत्री ने बताया कि लगभग 20 लोग घायल हुए हैं, जिनमें से अधिकांश की हालत स्थिर है, हालांकि कुछ घायलों का उपचार अभी भी जारी है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रारंभिक जांच में निर्माण योजना और स्वीकृति प्रक्रिया से जुड़े कुछ सवाल सामने आए हैं, जिनकी गहन जांच की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग की जानकारी
हादसे के बाद NDRF, SDRF, पुलिस, नगर निगम और भारतीय सेना की टीमें राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि जब तक यह सुनिश्चित नहीं हो जाता कि मलबे में कोई व्यक्ति फंसा नहीं है, तब तक अभियान जारी रहेगा।
सरकार का मानना है कि निर्माण स्थलों की व्यापक जांच और सुरक्षा मानकों की समीक्षा भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने में महत्वपूर्ण साबित होगी।