बंगाल में साल्बोनी जमीन घोटाले से सियासी हलचल, अभिषेक बनर्जी के करीबी का नाम आया सामने
बंगाल की राजनीति में भूचाल
बंगाल की राजनीतिक स्थिति में एक बार फिर से बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। साल्बोनी भूमि घोटाले की जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ रहे हैं, जिससे राज्य के प्रमुख नेताओं की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। जांच एजेंसी सीआईडी द्वारा अदालत में प्रस्तुत किए गए सबूतों ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।
सांसद के करीबी का नाम सामने आया
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब सांसद अभिषेक बनर्जी के करीबी सहयोगी का नाम उजागर हुआ। सीआईडी की पूछताछ में इस नए खुलासे के बाद पार्टी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
घोटाले की रकम और पार्टी का संबंध
जांच एजेंसियों के अनुसार, फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से बेची गई सरकारी भूमि से प्राप्त धन सीधे पार्टी के खाते में भेजा गया। पूर्व विधायक सुजय हाजरा और उनके पर्सनल असिस्टेंट सुमित रॉय की गिरफ्तारी के बाद कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ सामने आई हैं। अदालत में पेश किए गए दस्तावेजों से यह स्पष्ट हुआ है कि 2018 से 2021 के बीच लगभग 7 करोड़ रुपये कोलकाता की एक बैंक शाखा में जमा किए गए।
सुमित रॉय का बयान
सांसद के पर्सनल असिस्टेंट सुमित रॉय ने अदालत में कहा कि उन्होंने अपनी इच्छा से कोई धन जमा नहीं किया। उन्होंने बताया कि सांसद के ट्रेजरर से मिली राशि को उन्होंने केवल निर्देशानुसार बैंक खाते में ट्रांसफर किया। सुमित का कहना है कि इस भूमि के लेन-देन से उन्होंने व्यक्तिगत लाभ नहीं उठाया, बल्कि यह प्रक्रिया पार्टी के निर्देश पर की गई।
गवाहों के बयान से स्थिति और गंभीर
सीआईडी ने अपनी चार्जशीट में कई गवाहों के बयानों को शामिल किया है, जिनमें सुरक्षाकर्मी और ड्राइवर शामिल हैं। इन गवाहों ने सुमित और पूर्व विधायक के बीच पैसे के लेन-देन की पुष्टि की है। सुमित का सांसद कार्यालय से काम करना उनकी संलिप्तता को और स्पष्ट करता है।
केंद्रीय नेतृत्व से पूछताछ की संभावना
जिस बैंक खाते में 7 करोड़ रुपये जमा हुए, वह पश्चिम बंगाल तृणमूल यूथ कांग्रेस के नाम पर पंजीकृत है। सीआईडी अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यदि सुमित रॉय का बयान सही साबित होता है, तो सांसद अभिषेक बनर्जी से भी पूछताछ की जा सकती है। इससे जांच में तेजी आने की संभावना है।