बच्चन राम अरोड़ा: गांव से साहित्य और विधि जगत तक की प्रेरक यात्रा
साहित्य और विधि में अरोड़ा की प्रेरणादायक यात्रा
*गांव की मिट्टी से साहित्य और विधि जगत तक : अधिवक्ता बच्चन राम अरोड़ा की प्रेरक यात्रा*
*56 वर्षों से वकालत, 50 वर्षों से हरियाणा वक्फ बोर्ड के अधिवक्ता, कोरोना काल में शुरू हुआ लेखन*
चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी): अधिवक्ता और साहित्यकार बच्चन राम अरोड़ा का जीवन संघर्ष, शिक्षा, सेवा और सृजन का प्रेरणादायी उदाहरण है। एक साधारण ग्रामीण परिवेश से निकलकर उन्होंने विधि और साहित्य दोनों क्षेत्रों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। हाल ही में हरियाणा साहित्य एवं सांस्कृतिक अकादमी के मंच पर हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण ने उनके उत्कृष्ट एवं सराहनीय साहित्यिक योगदान के लिए उन्हें सम्मानित किया। इससे पहले उनकी पुस्तक '26 धक्के' को भी हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा सम्मानित किया जा चुका है तथा 24 जून 2026 को उन्हें 'हिंदी श्रेष्ठ कृति पुरस्कार' से नवाजा गया।
बच्चन राम अरोड़ा का जन्म एक गांव में हुआ, जहां उन्होंने दसवीं कक्षा तक की शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद वे रोहतक आए और पंजाब विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री हासिल की। वर्ष 1971 में उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से एलएलबी (ऑनर्स) की उपाधि प्राप्त की और वकालत के पेशे में कदम रखा। पिछले 56 वर्षों से वे अधिवक्ता के रूप में सक्रिय हैं।
अपने लंबे विधिक जीवन में उन्होंने अनेक प्रतिष्ठित संस्थाओं के विधिक सलाहकार के रूप में सेवाएं दी हैं। वे ऑल इंडिया जाट एजुकेशन सोसायटी, विश्वकर्मा एजुकेशन सोसायटी तथा गौड़ ब्राह्मण विद्या प्रचारिणी सभा के लंबे समय तक अधिवक्ता रहे हैं। पिछले 50 वर्षों से वे हरियाणा वक्फ बोर्ड के अधिवक्ता हैं। इसके साथ ही वे डॉ. विद्यासागर शिक्षण ट्रस्ट के जनरल सेक्रेटरी के रूप में भी सामाजिक एवं शैक्षणिक गतिविधियों से जुड़े हुए हैं।
छात्र जीवन में वे एक कुशल वक्ता और डिबेटर रहे। उन्होंने अपने कॉलेज का प्रतिनिधित्व राष्ट्रीय स्तर की वाद-विवाद प्रतियोगिताओं के साथ-साथ पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ में भी किया।
वर्ष 2021 में कोरोना संक्रमण के दौरान लगभग दो महीने तक गंभीर रूप से बीमार रहने के बाद उन्होंने लेखन को अपना नया माध्यम बनाया। इसी दौरान उनकी पहली पुस्तक '26 धक्के' लिखी गई, जिसे पाठकों और साहित्य जगत ने भरपूर सराहना दी। इस पुस्तक के लिए उन्हें हरियाणा साहित्य अकादमी का सम्मान और बाद में हिंदी श्रेष्ठ कृति पुरस्कार प्राप्त हुआ।
इसके बाद उनका साहित्यिक सफर लगातार आगे बढ़ता गया। उन्होंने 'थाउजेंड विजडम', 'योर विजडम', 'ऑल विजडम', 'सौ सिसू', '52 हीरोज', 'बच्चन दास के दोहे', '26 रॉन्ग नोशंस', 'वन इन 26' जैसी अनेक पुस्तकों का लेखन किया। वर्तमान में वे 'दो थैलियां', 'मां की ममता', 'बैड आई ऑन नेचर' तथा 'मेरे गीत' जैसी नई पुस्तकों पर कार्य कर रहे हैं।
विधि, शिक्षा, समाजसेवा और साहित्य—चारों क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान के कारण बच्चन राम अरोड़ा को अनेक सामाजिक, साहित्यिक एवं शैक्षणिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। गांव से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाले अरोड़ा का जीवन इस बात का सशक्त उदाहरण है कि दृढ़ संकल्प, निरंतर परिश्रम और सृजनशीलता से किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल की जा सकती है।