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बच्चों के लिए AI और सोशल मीडिया: वैश्विक चिंताएँ और भारत की स्थिति

बच्चों के लिए AI और सोशल मीडिया का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन क्या यह सुरक्षित है? भारत में 15 साल से कम उम्र के 18 करोड़ बच्चे स्मार्टफोन का उपयोग कर रहे हैं। जबकि कई देश बच्चों को AI और सोशल मीडिया से दूर रखने के लिए नियम बना रहे हैं, भारत सरकार इसे शिक्षा का हिस्सा बनाने पर जोर दे रही है। जानें इस विषय पर वैश्विक दृष्टिकोण और भारत की चुनौतियाँ।
 

बच्चों की डिजिटल दुनिया में AI का प्रभाव

नई दिल्ली, 22 जून 2026। यूट्यूब, इंस्टाग्राम, चैटजीपीटी और अन्य जेनरेटिव AI उपकरण अब बच्चों के दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। इस बीच, कई देशों ने यह सवाल उठाना शुरू कर दिया है कि क्या छोटे बच्चों को एल्गोरिदम और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभाव से बचाने की आवश्यकता है। यह बहस अब तेज हो गई है।


भारत में 15 वर्ष से कम उम्र के 18 करोड़ से अधिक बच्चे नियमित रूप से स्मार्टफोन का उपयोग कर रहे हैं। ये बच्चे केवल वीडियो देखने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे सोशल मीडिया का संचालन भी करते हैं और AI उपकरणों का उपयोग करते हैं। इस पर सवाल उठने लगे हैं।


दुनिया क्यों लगा रही है रोक?

नॉर्वे ने सोशल मीडिया के उपयोग की न्यूनतम आयु 16 वर्ष निर्धारित करने का प्रस्ताव रखा है। टेक कंपनियों को उम्र सत्यापन की कानूनी जिम्मेदारी सौंपने की योजना बनाई गई है। सरकार का तर्क स्पष्ट है: पहले शिक्षा, फिर तकनीक।


ऑस्ट्रेलिया ने भी 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया और एल्गोरिदम आधारित प्लेटफार्मों पर सख्त प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। ध्यान केंद्रित करने की क्षमता, मानसिक स्वास्थ्य और ऑनलाइन सुरक्षा इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।


यूरोपीय संघ ने डिजिटल सर्विसेज एक्ट (DSA) के तहत बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। कंपनियों को बच्चों की प्रोफाइलिंग करने की अनुमति नहीं है और लक्षित विज्ञापन भी नहीं दिखाए जा सकते। यूरोपीय आयोग ने उम्र सत्यापन के लिए विशेष ऐप भी जारी किया है।


फ्रांस और डेनमार्क स्कूलों को मोबाइल-मुक्त क्षेत्र बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं, जिससे स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण बढ़ रहा है।


भारत में तस्वीर बिल्कुल अलग

भारत दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल बाजारों में से एक है। DataReportal के आंकड़ों के अनुसार, देश में 1.06 अरब से अधिक मोबाइल कनेक्शन और 1.03 अरब इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं।


IAMAI-Kantar की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 95.8 करोड़ सक्रिय इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं। 94 प्रतिशत से अधिक लोग इंटरनेट का उपयोग करने के लिए स्मार्टफोन का सहारा लेते हैं।


15 से 29 वर्ष की आयु के 95.5 प्रतिशत ग्रामीण और 97.6 प्रतिशत शहरी युवाओं के पास स्मार्टफोन है। एक भारतीय उपयोगकर्ता औसतन हर महीने 37GB डेटा खर्च करता है, जो कि दुनिया में सबसे अधिक है।


बच्चों को AI सिखा रही सरकार

भारत सरकार AI को शिक्षा का हिस्सा बनाने पर जोर दे रही है। अटल इनोवेशन मिशन और इंडियाAI मिशन के तहत 13 से 21 वर्ष के युवाओं के लिए YUVAi ग्लोबल यूथ चैलेंज जैसे कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।


शिक्षा मंत्रालय ने 'AI फॉर स्कूल्स' पहल के माध्यम से सीबीएसई के 18 हजार से अधिक स्कूलों में AI आधारित पाठ्यक्रम शुरू किया है, जिसका दायरा अब निचली कक्षाओं तक बढ़ाया जा रहा है।


सबसे बड़ी चिंता क्या है?

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में डेटा सुरक्षा के नियम तो हैं, लेकिन बच्चों के मानसिक विकास, व्यवहार और जेनरेटिव AI के प्रभाव पर कोई व्यापक नीति नहीं है।


उम्र सत्यापन भी एक चुनौती बना हुआ है। कोई भी बच्चा गलत जन्मतिथि दर्ज कर सोशल मीडिया या AI प्लेटफार्मों तक पहुंच बना सकता है, जिससे निगरानी करना मुश्किल हो जाता है।


DPDP नियमों के तहत 18 साल से कम उम्र के बच्चों का डेटा प्रोसेस करने से पहले माता-पिता की सत्यापित सहमति आवश्यक होगी। कंपनियों को बच्चों को लक्षित विज्ञापन दिखाने की अनुमति नहीं होगी।


AI का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। IAMAI के अनुसार, देश के 44 प्रतिशत इंटरनेट उपयोगकर्ता किसी न किसी रूप में AI फीचर्स का उपयोग कर रहे हैं। 10 करोड़ से अधिक सक्रिय AI उपयोगकर्ता हैं, जिनमें 15 से 24 वर्ष की आयु वर्ग सबसे आगे है।


यहीं से बहस शुरू होती है। जबकि दुनिया बच्चों को AI से दूर रखने के नियम बना रही है, भारत उन्हें AI के साथ भविष्य के लिए तैयार करने में जुटा हुआ है।