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बठिंडा में जासूसी गिरोह का पर्दाफाश, सुरक्षा एजेंसियों पर नजर रखने का आरोप

बठिंडा में पुलिस और काउंटर इंटेलिजेंस ने एक जासूसी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो भारतीय सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की गतिविधियों की निगरानी कर रहा था। गिरोह ने सोलर लाइट में छिपा कैमरा लगाकर संवेदनशील जानकारी को विदेशों में भेजा। अब तक दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि अन्य की तलाश जारी है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और गिरोह की गतिविधियों का दायरा।
 

सुरक्षा एजेंसियों की गतिविधियों पर नजर रखने वाला गिरोह


सोलर लाइट में छिपा था जासूसी का उपकरण


बठिंडा। बठिंडा में पुलिस और काउंटर इंटेलिजेंस ने एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। उन्होंने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो भारतीय सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की गतिविधियों की निगरानी कर रहा था। यह गिरोह न केवल इन गतिविधियों को रिकॉर्ड कर रहा था, बल्कि जानकारी को विदेशों में बैठे अपने आकाओं तक भी पहुंचा रहा था।


अब तक दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि अन्य दो की तलाश जारी है। जांच में यह सामने आया कि बठिंडा-मलोट मार्ग पर अंबुजा फैक्ट्री के पास एक सोलर ऊर्जा संचालित कैमरा स्थापित किया गया था। इस कैमरे में एक सक्रिय सिम कार्ड था, जिससे दूर से लाइव निगरानी की जा रही थी। जांच एजेंसियों का मानना है कि इसे एक सुनियोजित तरीके से ऐसे स्थान पर लगाया गया था, जिससे राष्ट्रीय राजमार्ग पर गतिविधियों पर नजर रखी जा सके।


गिरोह की गतिविधियों का दायरा

राजस्थान तक फैला था जासूसी नेटवर्क


प्रारंभिक जांच से पता चला है कि गिरोह का मुख्य उद्देश्य राजस्थान, फाजिल्का और फिरोजपुर सीमा क्षेत्रों में सैन्य वाहनों और सुरक्षा बलों की गतिविधियों की निगरानी करना था। एकत्रित वीडियो फुटेज कथित तौर पर पाकिस्तान और कनाडा में बैठे देश विरोधी तत्वों तक पहुंचाई जा रही थी। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. ज्योति यादव बैंस ने विशेष जांच टीमें गठित की हैं। पुलिस और काउंटर इंटेलिजेंस ने सीसीटीवी रिकॉर्डिंग, तकनीकी साक्ष्यों और मानव खुफिया तंत्र का उपयोग कर पूरे नेटवर्क का पता लगाने का प्रयास किया।