बरेली में जल जीवन मिशन की पानी की टंकी नदी में समाई, भ्रष्टाचार के आरोप
बरेली में जल जीवन मिशन का बड़ा भ्रष्टाचार
बरेली। उत्तर प्रदेश में मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन के तहत एक और भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। बरेली में लगभग 4 करोड़ रुपये की लागत से बन रही पानी की टंकी मात्र 4 सेकंड में किच्छा नदी में गिर गई। यह जानकर हैरानी होती है कि चार दिन पहले ही इसकी बाउंड्रीवाल भी नदी में बह गई थी, लेकिन अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की।
जानकारी के अनुसार, यह घटना शेरगढ़ ब्लॉक की ग्राम पंचायत बैरमनगर में हुई। मंगलवार सुबह किच्छा नदी में तेज बहाव के कारण कटान शुरू हुआ, जिससे निर्माणाधीन टंकी हिलने लगी और कुछ ही क्षणों में नदी में ढह गई। घटना की जानकारी मिलते ही एसडीएम निधि मौके पर पहुंचीं और स्थानीय लोगों से जानकारी ली।
2023 से चल रहा था निर्माण कार्य
जल जीवन मिशन के तहत यह टंकी 2023 से बनाई जा रही थी। इसका पूरा ढांचा, फाउंडेशन, परिसर, कमरा और गेट का काम पूरा हो चुका था। पाइपलाइन बिछाने का कार्य भी संपन्न हो चुका था और गांव के 70 फीसदी घरों में पानी की टोटियां लगाई जा चुकी थीं। केवल टंकी का काम बाकी था, जिससे ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल मिलने की उम्मीद थी।
नदी से 100 मीटर दूर थी टंकी
ग्राम प्रधान शमशुल खां ने बताया कि एक सप्ताह पहले नदी टंकी से लगभग 100 मीटर दूर थी, लेकिन कटान की गति इतनी तेज थी कि चार दिन पहले ही बाउंड्रीवाल बह गई। उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने मौके पर आकर सोलर पैनल, डीजी सेट, स्काडा सिस्टम और जनरेटर जैसे महंगे सामान को सुरक्षित कर लिया, लेकिन टंकी को बचाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया। प्रधान ने कहा कि हमने अधिकारियों को चेतावनी दी थी कि यदि कटान रोकने के लिए पिचिंग नहीं कराई गई तो टंकी बह जाएगी, लेकिन किसी ने हमारी बात नहीं सुनी। यदि समय पर कार्रवाई होती, तो 4 करोड़ की टंकी बचाई जा सकती थी।
इंजीनियरों के सर्वे पर सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि टंकी के निर्माण से पहले इंजीनियरों ने सर्वे किया था, लेकिन नदी के कटान वाले क्षेत्र को नजरअंदाज किया गया। अब ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि क्या बिना उचित योजना के नदी के किनारे टंकी बनाकर सरकारी धन की बर्बादी की गई?
कांग्रेस ने उठाए सवाल
उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए लिखा कि बरेली के शेरगढ़ क्षेत्र में 4 करोड़ की लागत से बन रही पानी की टंकी बिना उद्घाटन के ही किच्छा नदी में समा गई। पार्टी ने कहा कि पानी की टंकी का निर्माण प्यासों को पानी देने के लिए किया गया था, लेकिन यह खुद ही नदी को पानी देने निकल पड़ी। इसे अद्भुत तालमेल कहा जा सकता है—भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा पैसा और नदी में बहती टंकी। भाजपा सरकार में विकास की गति इतनी तेज है कि 4 करोड़ की इमारतें कागजों से निकलकर सीधे धाराओं में तैरने लगती हैं।