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बलूचिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र की चिंता

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 61वें सत्र में बलूच कार्यकर्ता सबीहा बलूच ने बलूचिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने ज़बरन गायब होने और न्यायेतर हत्याओं के मामलों को उजागर किया, जो इस क्षेत्र में बढ़ते राज्य-समर्थित दुर्व्यवहारों का संकेत देते हैं। बलूच ने नागरिक स्वतंत्रताओं पर लगे प्रतिबंधों और असहमति की आवाज़ को दबाने के प्रयासों की भी आलोचना की। उनकी अपील के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र को इस स्थिति की स्वतंत्र जांच करनी चाहिए।
 

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद का 61वां सत्र

नई दिल्ली। बलूच कार्यकर्ता सबीहा बलूच ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 61वें सत्र में बलूचिस्तान में मानवाधिकारों की गंभीर स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने इस क्षेत्र में राज्य-समर्थित दुर्व्यवहारों के बढ़ते मामलों की ओर ध्यान आकर्षित किया। बलूच ने बलूच यकजेहती समिति की ओर से बोलते हुए कहा कि यह प्रांत विदेशी-समर्थित विकास परियोजनाओं का केंद्र होने के बावजूद अपने लोगों के खिलाफ गंभीर उल्लंघनों का सामना कर रहा है।

बलूच ने ज़बरन गायब होने के मामलों को उजागर किया और आरोप लगाया कि बलूच लोगों को अक्सर संदिग्ध परिस्थितियों में उठाया जाता है, जिससे उनके परिवारों को उनके ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं मिलती। उन्होंने न्यायेतर हत्याओं और क्षत-विक्षत शवों की बरामदगी की घटनाओं का भी उल्लेख किया, जो कि एक व्यापक और व्यवस्थित प्रवृत्ति को दर्शाती हैं।

उन्होंने नागरिक स्वतंत्रताओं पर लगे प्रतिबंधों का भी जिक्र किया, जिसमें पत्रकार, छात्र, वकील और मानवाधिकार रक्षक शामिल हैं, जो अक्सर आतंकवाद रोधी कानूनों के तहत डराने-धमकाने और गिरफ्तारी का शिकार होते हैं। बलूच ने कहा कि इन उपायों का उपयोग असहमति की आवाज़ को दबाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि BYC के कई नेता, जिनमें महरंग बलूच शामिल हैं, लंबे समय से हिरासत में हैं, जो एक चिंताजनक स्थिति है।

अपनी बात समाप्त करते हुए, बलूच ने संयुक्त राष्ट्र से बलूचिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच करने का अनुरोध किया। बलूचिस्तान में ज़बरन गायब होने की प्रवृत्ति ने स्थानीय आबादी के बीच असुरक्षा और अविश्वास को बढ़ा दिया है। मनमानी गिरफ्तारियों का खतरा और जवाबदेही की कमी इस क्षेत्र को अस्थिर कर रही है, जिससे शांति और न्याय की बहाली में बाधा उत्पन्न हो रही है।