बांग्लादेश में भगवान राम की प्रतिमा निर्माण पर विवाद, हिंदू समुदाय का प्रदर्शन
गाइबांधा में भगवान राम की प्रतिमा का निर्माण रोकने का विवाद
ढाका/गाइबांधा: बांग्लादेश के गाइबांधा जिले में प्रस्तावित 81 फीट ऊंची भगवान राम की प्रतिमा के निर्माण को रोकने के निर्णय ने विवाद को जन्म दिया है। इस फैसले के खिलाफ स्थानीय हिंदू समुदाय ने सड़कों पर उतरकर मशाल जुलूस निकाला और प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने इसे अपनी धार्मिक भावनाओं से जोड़ते हुए इस निर्णय की कड़ी आलोचना की।
मानवाधिकार संगठन *जस्टिस मेकर्स बांग्लादेश इन फ्रांस (JMBF)* ने भी इस मामले पर चिंता व्यक्त की है। संगठन का आरोप है कि प्रतिमा निर्माण पर रोक का निर्णय स्थानीय इस्लामिक संगठनों के दबाव में लिया गया। हालांकि, बांग्लादेश सरकार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
JMBF के अनुसार, जब मंदिर परिसर में भगवान राम की विशाल प्रतिमा स्थापित करने की योजना का खुलासा हुआ, तो कुछ स्थानीय धार्मिक संगठनों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया। इसके चलते रैलियां आयोजित की गईं, प्रेस कॉन्फ्रेंस की गईं और प्रशासन को ज्ञापन भी सौंपे गए। बढ़ते तनाव और संभावित हिंसा की आशंका को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने 12 जून को प्रतिमा निर्माण का कार्य रोकने का निर्णय लिया। यह कदम समुदाय की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया।
इस मुद्दे पर भारत ने भी चिंता जताई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता **रणधीर जायसवाल** ने कहा कि भारत को उम्मीद है कि बांग्लादेश सरकार धार्मिक कट्टरता से जुड़े मामलों पर प्रभावी कार्रवाई करेगी और हिंदू तथा अन्य अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी। JMBF ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है। संगठन का कहना है कि सभी समुदायों को अपनी धार्मिक आस्था के अनुसार पूजा-अर्चना और धार्मिक गतिविधियों का अधिकार मिलना चाहिए।
अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर उठते रहे हैं सवाल
यह ध्यान देने योग्य है कि बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में सांप्रदायिक तनाव, पूजा स्थलों पर हमले और अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं। राजनीतिक अस्थिरता के दौर में भारत ने भी कई बार हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की है।